यह चुनाव सिर्फ वोट नहीं, अस्तित्व की लड़ाई है — गोसाईंगांव में कल्पना सोरेन का बड़ा बयान

असम: 2 अप्रैल को असम के गोसाईंगांव विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया, जब गाण्डेय विधायक कल्पना सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) प्रत्याशी फैड्रिक्शन हांसदा के समर्थन में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित किया।

जनसभा में उमड़ी भारी भीड़ के बीच कल्पना सोरेन ने अपने जोशीले भाषण से लोगों के दिलों में एक नई उम्मीद और आत्मविश्वास जगाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह चुनाव सिर्फ एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि असम के आदिवासी समाज के अस्तित्व, अधिकार और भविष्य से जुड़ा हुआ एक निर्णायक मोड़ है।



यह चुनाव हमारी पहचान और अधिकार की लड़ाई है
अपने संबोधन में उन्होंने कहा:
"यह चुनाव सिर्फ वोट का नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व, हमारे अधिकार और हमारे आने वाले कल का चुनाव है।"

उनके इस बयान ने जनसभा में मौजूद हजारों लोगों के अंदर एक नई ऊर्जा भर दी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों और एकजुट होकर अपने भविष्य का फैसला करें।


चाय बागान मजदूरों की पीड़ा को उठाया मुद्दा
कल्पना सोरेन ने वर्षों से चाय बागानों में काम कर रहे आदिवासी श्रमिकों की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि
"हमारे भाई-बहन पीढ़ियों से चाय बागानों में मेहनत कर रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें वह सम्मान और अधिकार नहीं मिला, जिसके वे हकदार हैं।"

उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब समय आ गया है जब इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई जाए और अपने हक को मजबूती से मांगा जाए।
अपने भाषण के अंत में उन्होंने एक मजबूत संदेश देते हुए कहा:
"अब समय बदल रहा है… अब समय है अपने अधिकार मांगने का, अपना सम्मान वापस लेने का।"

यह संदेश जनसभा में उपस्थित हर व्यक्ति के दिल को छू गया और पूरे माहौल को जोश और उम्मीद से भर दिया।


जनता से की निर्णायक अपील
कल्पना सोरेन ने लोगों से झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने की अपील करते हुए कहा कि यह चुनाव सिर्फ एक उम्मीदवार को जिताने का नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और सम्मान की लड़ाई जीतने का अवसर है।

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