मजदूरों की मांग: 26 दिन का रोजगार और ठेकेदारी प्रथा का अंत!
दिनकर कच्छप ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि फ्लोर नर्सरी में मजदूरों को केवल 15-15 दिनों का काम दिया जा रहा है, जो उनकी आजीविका के लिए अपर्याप्त है। उन्होंने मांग की कि मजदूरों को कम से कम 26 दिन का रोजगार प्रदान किया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने ठेकेदारी प्रथा को श्रमिक कानूनों के खिलाफ बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग की। कच्छप ने आरोप लगाया कि ठेकेदारी प्रथा के जरिए आदिवासी और दलित मजदूरों का शोषण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "जमशेदपुर में टाटा कंपनी को आदिवासियों की जमीन दी गई थी, लेकिन अब उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक और लखनऊ से वेंडर लाकर स्थानीय आदिवासी और दलित मजदूरों का शोषण किया जा रहा है। यह अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
वेंडर प्रिया ज्योति मुखर्जी पर गंभीर आरोप!
दिनकर कच्छप ने वेंडर प्रिया ज्योति मुखर्जी पर महिला मजदूरों के साथ दुर्व्यवहार और अनुचित व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रिया ज्योति मुखर्जी काम के दौरान थकी हुई महिला मजदूरों के लंच ब्रेक के समय उनके कमरे में जाकर गलत नजरों से देखते हैं और आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हैं। कच्छप ने बताया कि मजदूरों को डराया-धमकाया जाता है और काम से निकालने या चोरी का झूठा आरोप लगाने की धमकी दी जाती है।
डोली मार्डी की आत्महत्या का मामला आरोप!
प्रदर्शन के दौरान दिनकर कच्छप ने गोविंदपुर की रहने वाली डोली मार्डी की आत्महत्या का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि प्रिया ज्योति मुखर्जी ने डोली के साथ आपत्तिजनक और अपमानजनक व्यवहार किया, जिसके बाद उसे काम से निकाल दिया गया। इस मानसिक दबाव के कारण डोली ने अपने घर में आत्महत्या कर ली। कच्छप ने कहा, "प्रिया ज्योति मुखर्जी ने महिला मजदूरों के साथ गलत बातें कीं, अपशब्द बोले और उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाया। ऐसे व्यक्ति को तुरंत ब्लैक लिस्ट करना चाहिए।"
टाटा मोटर्स को चेतावनी!
बिरसा सेना और मजदूरों ने टाटा मोटर्स प्रबंधन को 30 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। कच्छप ने कहा, "अगर प्रिया ज्योति मुखर्जी को एक महीने के भीतर ब्लैक लिस्ट नहीं किया गया, तो आदिवासी और दलित मजदूर बिरसा सेवा के बैनर तले टाटा मोटर्स के गेट को जाम करेंगे और उग्र आंदोलन शुरू करेंगे।" उन्होंने यह भी मांग की कि मजदूरों के साथ होने वाले अन्याय को रोका जाए और ठेकेदारी प्रथा के दुरुपयोग को समाप्त किया जाए।
टाटा मोटर्स और स्थानीय समुदाय का तनाव!
यह प्रदर्शन टाटा मोटर्स और स्थानीय मजदूरों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है। इससे पहले भी टेल्को मजदूर यूनियन ने ठेकाकर्मियों को काम से हटाए जाने के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी थी। मजदूरों का कहना है कि टाटा मोटर्स की वेंडर कंपनियां स्थानीय लोगों के बजाय बाहरी राज्यों से ठेकेदार और मजदूर ला रही हैं, जिससे स्थानीय आदिवासी और दलित समुदाय के लोगों को रोजगार के अवसरों से वंचित किया जा रहा है।
फ्लोर नर्सरी में मजदूरों का यह प्रदर्शन न केवल रोजगार और श्रमिक अधिकारों की मांग को उजागर करता है, बल्कि ठेकेदारी प्रथा और कथित शोषण के खिलाफ स्थानीय समुदाय के गुस्से को भी दर्शाता है। टाटा मोटर्स प्रबंधन के सामने अब यह चुनौती है कि वह इन मांगों पर कैसे प्रतिक्रिया देता है। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आने वाले दिनों में जमशेदपुर में और बड़े आंदोलन की आशंका है।

