धर्म परिवर्तन करते ही खत्म होगा SC स्टेटस? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

भारत में अनुसूचित जाति (SC) से जुड़े अधिकार और आरक्षण ,को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल उठा—क्या धर्म परिवर्तन के बाद भी SC का दर्जा बना रहता है? इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक स्पष्ट और सख्त फैसला सुनाया है, जिसने इस बहस को नई दिशा दे दी है।

क्या था पूरा मामला?
यह मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा था, जिसने अनुसूचित जाति में जन्म लेने के बाद ईसाई धर्म अपना लिया और पादरी बन गया। बाद में उसने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC/ST Act) के तहत कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। लेकिन सवाल उठा—क्या धर्म बदलने के बाद भी वह व्यक्ति SC का लाभ ले सकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ तौर पर कहा कि अगर कोई व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म को छोड़कर किसी अन्य धर्म (जैसे ईसाई या इस्लाम) को अपनाता है,
और वह उस धर्म का पालन भी करता है, तो उसका अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा खत्म हो जाता है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि: SC का दर्जा केवल उन लोगों के लिए है जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म में रहते हैं।

क्यों खत्म हो जाता है SC स्टेटस?
इसका आधार संविधान (Scheduled Castes) Order, 1950 है, जिसमें यह निर्धारित किया गया है कि SC का दर्जा किन धर्मों तक सीमित रहेगा।

 शुरुआत में यह केवल हिंदुओं तक सीमित था लेकिन बाद में इसे सिख (1956) और बौद्ध (1990) धर्म तक बढ़ाया गया लेकिन ईसाई और मुस्लिम धर्म अपनाने वालों को इसमें शामिल नहीं किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि: SC का दर्जा सामाजिक भेदभाव और छुआछूत जैसी ऐतिहासिक परिस्थितियों से जुड़ा है, लेकिन जब कोई व्यक्ति धर्म बदलता है, तो वह उन धार्मिक-सामाजिक संरचनाओं से बाहर निकल जाता है, जिनके आधार पर SC का दर्जा दिया गया था

इसलिए, धर्म परिवर्तन के बाद SC के अधिकार और आरक्षण का दावा नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो अनुसूचित जाति में जन्म लिया है लेकिन बाद में ईसाई या अन्य धर्म अपना लिया है क्योंकि ऐसे लोग अब SC आरक्षण या SC/ST Act के तहत मिलने वाले कानूनी संरक्षण का लाभ नहीं ले पाएंगे।

 

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