असम: 28 मार्च को असम के कोकराझार में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान लोगों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने आगामी असम विधानसभा चुनाव को लेकर एक मजबूत और स्पष्ट संदेश दिया, जो खासकर वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों के लिए था।
अब समय आ गया है बदलाव का
अपने संबोधन में Hemant Soren ने कहा कि असम के आदिवासी, पिछड़े और वंचित समाज ने वर्षों तक अन्याय और उपेक्षा झेली है। अब वक्त आ गया है कि ये समाज एकजुट होकर अपने हक-अधिकार के लिए आवाज उठाए।
उन्होंने लोगों को जागरूक करते हुए कहा:
“अब और नहीं। वर्षों की पीड़ा का जवाब वोट से दो।”
तीर-धनुष को वोट देने की अपील
अपने भाषण में उन्होंने स्पष्ट रूप से लोगों से अपील की कि वे चुनाव में तीर-धनुष (Tir-Dhanush) चुनाव चिन्ह को चुनें।
उनका कहना था कि यही प्रतीक वंचित और शोषित वर्गों के अधिकारों की रक्षा का माध्यम बन सकता है।
यह संदेश सिर्फ एक राजनीतिक अपील नहीं था, बल्कि सामाजिक न्याय और अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक भी था।
उन्होंने लोगों को यह भी समझाया कि:
“वोट सिर्फ एक अधिकार नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।”
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