जामताड़ा जिले के माड़ालो-जाबरदहा गाँव में 22 मार्च 2026 (रविवार) को खनिज एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण और निर्णायक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में गाँव के गणमान्य व्यक्तियों, परंपरागत पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सक्रिय भागीदारी निभाई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि समुदाय अपने संसाधनों को लेकर सजग और प्रतिबद्ध है।
बैठक का मुख्य उद्देश्य गाँव के भीतर मौजूद प्राकृतिक संपदा—जैसे खनिज, जल, जंगल और जमीन की रक्षा और संरक्षण के लिए ठोस रणनीति तैयार करना था। चर्चा के दौरान सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि ग्राम सभा को और अधिक सशक्त और प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि संसाधनों की सुरक्षा में स्थानीय समुदाय की सीधी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
ग्रामीणों ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि वे अपनी पारंपरिक व्यवस्था और सामुदायिक अधिकारों के तहत प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करेंगे। साथ ही, किसी भी प्रकार के अवैध खनन, दोहन या बाहरी हस्तक्षेप का सशक्त विरोध किया जाएगा। यह निर्णय न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय स्वशासन की मजबूती को भी दर्शाता है।
बैठक में यह भी तय किया गया कि ग्राम सभा के माध्यम से समय-समय पर निगरानी अभियान और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इन प्रयासों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि संसाधनों का उपयोग संतुलित, सतत और न्यायपूर्ण तरीके से हो, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी ये सुरक्षित रह सकें।
माड़ालो-जाबरदहा गाँव की यह पहल क्षेत्र में एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में उभर रही है, जो यह दिखाती है कि जब समुदाय संगठित होता है, तो वह अपने अधिकारों और संसाधनों की रक्षा के लिए मजबूत कदम उठा सकता है। यह प्रयास ग्राम सभा की ताकत और सामूहिक जिम्मेदारी का सशक्त संदेश देता है।
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