रांची, 16 मार्च। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर झारखंड जनाधिकार महासभा की ओर से रांची में महिलाओं के अधिकार और आजादी पर एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में झारखंड के अलग-अलग इलाकों से आई सैकड़ों महिलाओं ने भाग लिया और समाज में महिलाओं की स्थिति, भेदभाव और उनके अधिकारों पर चर्चा की।
कार्यक्रम का संचालन अलका आईंद, लीना और रोज मधु तिर्की ने किया। आधार पत्र प्रस्तुत करते हुए किरण ने कहा कि महिला दिवस महिलाओं के अधिकारों और बराबरी की लड़ाई की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि समाज और कई धार्मिक व्यवस्थाओं में आज भी महिलाओं को पुरुषों के बराबर नहीं माना जाता, इसलिए महिलाओं को एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ता नीलम तिग्गा ने कहा कि समाज में अक्सर महिलाओं को घर के काम तक सीमित रखने की कोशिश की जाती है और उनकी स्वतंत्रता पर कई तरह की पाबंदियां लगाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में बराबरी का मौका मिलना चाहिए।
एपवा की नंदिता भट्टाचार्य ने कहा कि महिलाओं ने लंबे संघर्ष के बाद कई अधिकार हासिल किए हैं, लेकिन इन अधिकारों को बचाए रखना भी जरूरी है। उन्होंने महिलाओं से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की।
थेयोलॉजिकल कॉलेज से जुड़ी प्रो. इदन टोपनो ने कहा कि कई धार्मिक संस्थाओं में आज भी महिलाओं की भागीदारी कम है। उन्होंने कहा कि समाज और धार्मिक संस्थाओं को इस पर विचार करना चाहिए कि महिलाओं को बराबरी का स्थान कैसे मिले।
सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला ने कहा कि झारखंड में आदिवासी महिलाओं का संघर्ष का लंबा इतिहास रहा है और राज्य आंदोलन में भी उनकी बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि अब महिलाओं को राजनीतिक और सामाजिक निर्णयों में भी अधिक भागीदारी मिलनी चाहिए।
सम्मेलन में कई महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए और महिलाओं के खिलाफ हिंसा, भेदभाव और अन्य समस्याओं पर चिंता जताई। कार्यक्रम में गीत और कविताओं के माध्यम से भी महिलाओं की बात रखी गई।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने महिलाओं की समानता, सम्मान और अधिकारों के लिए मिलकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
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