Jharkhand: विधानसभा के बजट सत्र के दौरान डुमरी के विधायक Jairam Mahato ने मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग, मंत्रिमंडल निर्वाचन विभाग, राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग, कार्मिक प्रशासनिक विभाग तथा भाषा संबंधी विभागों के अनुदान मांग बजट पर चर्चा करते हुए कटौती प्रस्ताव के समर्थन में अपनी बात रखी।इस दौरान उन्होंने झारखंड की पहचान, जमीन और सामाजिक अधिकारों से जुड़े कई अहम मुद्दों को जोरदार तरीके से सदन में उठाया।
“झारखंड की आत्मा उसकी जमीन में बसती है”
अपने भाषण में जयराम महतो ने कहा कि झारखंड के लोगों की आत्मा उनकी जमीन और खेतों में बसती है। उन्होंने कहा कि इस राज्य के लोग अपनी जमीन को जान से भी ज्यादा महत्व देते हैं।
सदन में उन्होंने अपने पारंपरिक अंदाज में कहा —
“हामर खेत, हामर दाना, पैट काटी नहीं देवो खजाना।”
अर्थात झारखंड के लोग अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।
इतिहास की लड़ाइयों का किया जिक्र
जयराम महतो ने झारखंड की ऐतिहासिक लड़ाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि 1757 की Battle of Plassey और 1764 की Battle of Buxar के बाद जब अंग्रेज इस क्षेत्र में प्रवेश करने लगे, तब 1769 में Raghunath Mahato के नेतृत्व में चुहाड़ आंदोलन हुआ जिसने अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी।
उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद भी इस क्षेत्र में कई महान आदिवासी नायकों ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया, जिनमें Tilka Manjhi, Telanga Kharia, Sidhu Murmu, Kanhu Murmu, Nilamber-Pitamber और Birsa Munda जैसे महान योद्धा शामिल हैं।उन्होंने कहा कि इन सभी संघर्षों का मूल कारण झारखंड की जमीन और पहचान की रक्षा करना था।
जमीन बचाने के लिए बने कानून
जयराम महतो ने कहा कि अंग्रेजों ने जब यह समझ लिया कि झारखंड के लोग अपनी जमीन के लिए जान तक दे सकते हैं, तब उन्होंने विशेष कानून बनाए।
इसी क्रम में कोल्हान क्षेत्र के लिए 1837 में विल्किंसन रूल, 1908 में छोटानागपुर क्षेत्र के लिए Chotanagpur Tenancy Act 1908 तथा 1949 में संथाल परगना क्षेत्र के लिए Santhal Parganas Tenancy Act 1949 लागू किया गया ताकि वहां की जमीनों की रक्षा की जा सके।
कंपनियों द्वारा जमीन अधिग्रहण पर सवाल
जयराम महतो ने आरोप लगाया कि आज भी बड़े उद्योग और कंपनियां रैयतों की जमीनों का अधिग्रहण कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के जाने के बाद भी उसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है।
इस संदर्भ में उन्होंने NTPC, BCCL, ECL, Rungta Group, Tata Group और Adani Group जैसी कंपनियों का उल्लेख करते हुए कहा कि रैयतों की जमीनों को मनमाने तरीके से अधिग्रहित किया जा रहा है।
पहाड़ा राजा सोमा मुंडा की हत्या का मुद्दा उठाया
विधायक जयराम महतो ने जमीन से जुड़े विवाद में मारे गए पहाड़ा राजा सोमा मुंडा की हत्या का मामला भी सदन में उठाया और सरकार से इस मामले में गंभीर कार्रवाई की मांग की।
कुड़मी और सूड़ी समुदाय के लिए आरक्षण की मांग
जयराम महतो ने कुड़मी समुदाय के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि 1872 से 1931 के बीच कुड़मी समाज को एबोर्जिनल, एनिमिस्ट और प्रीमिटिव ट्राइब के रूप में मान्यता प्राप्त थी, उन्होंने आरोप लगाया कि 1950 की जनगणना में बिना किसी अधिसूचना के कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची से बाहर कर दिया गया।
इसलिए उन्होंने कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल करने और सूड़ी समुदाय को अनुसूचित जाति (SC) में सूचीबद्ध करने की मांग की।
झारखंड राज्य गठन के आधार का भी किया जिक्र
उन्होंने कहा कि 1990 में गृह मंत्रालय की झारखंड मामले की समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही झारखंड राज्य का गठन हुआ था, जिसमें आदिवासी समुदायों के साथ-साथ गैर-आदिवासी समुदायों जैसे कुड़मी और महतो को भी आधार माना गया था।
सोशल मीडिया पर अधिकारियों की सक्रियता की मांग
जयराम महतो ने मुख्यमंत्री Hemant Soren के ट्विटर पर सक्रिय रहने की सराहना की, लेकिन राज्य के अन्य विभागों के सचिव और प्रधान सचिव के सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं रहने पर नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के इस दौर में सभी सरकारी सचिवों को ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहना चाहिए ताकि जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।
1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति की मांग
अपने भाषण के अंत में जयराम महतो ने सरकार से 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति बनाने की मांग की।उन्होंने कहा कि झारखंड बने हुए 25 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आज तक राज्य में स्पष्ट स्थानीय नीति तय नहीं हो पाई है।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जल्द से जल्द स्थानीय नीति पर निर्णय लेकर राज्य के युवाओं और मूलवासियों को न्याय दिलाया जाए।
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