चांडिल में बाहा पर्व पर आदिवासियों ने निकाला विशाल सेंदरा यात्रा

सांस्कृतिक समाचार

चांडिल में बाहा पर्व की धूम, परंपरा और संस्कृति का भव्य संगम

सेंदरा कार्यक्रम बना आकर्षण का केंद्र, बाइक रैली में दिखी सांस्कृतिक एकता

चांडिल।

आदिवासी समाज की समृद्ध परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से 22 मार्च को चांडिल गोलचक्कर क्षेत्र में बाहा पर्व पूरे उत्साह, श्रद्धा और पारंपरिक विधि-विधान के साथ मनाया गया। यह आयोजन न केवल एक पर्व था, बल्कि प्रकृति के प्रति आस्था, समाज की एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनकर उभरा।

आयोजन झारखंड दिशोम बाहा सरहुल समिति, आदिवासी समन्वय समिति तथा पातकोम दिशोम जाहेरगाढ़ समिति के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।

इस भव्य आयोजन का संचालन झारखंड दिशोम बाहा सरहुल समिति, आदिवासी समन्वय समिति तथा पातकोम दिशोम जाहेरगाढ़ समिति के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिसमें सेंदरा कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

प्रकृति पर्व सरहुल का शांतिपूर्ण समापन

कार्यक्रम की शुरुआत 21 मार्च (शनिवार) को सरहुल-बाहा पर्व के विधिवत समापन के साथ हुई। पारंपरिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया। पूरा माहौल श्रद्धा और शांति से भरा रहा।

सेंदरा: परंपरा और पहचान का प्रतीक

बाहा पर्व के दूसरे दिन, रविवार को सेंदरा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कुनाबुरु फुटबॉल मैदान से चांडिल गोलचक्कर स्थित दिशोम जाहेर तक भव्य बाइक रैली के रूप में निकाला गया।

सेंदरा, आदिवासी समाज की एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहचान है, जिसे “बाहा सेंदरा” या “सरहुल सेंदरा” भी कहा जाता है।

बाइक रैली और पारंपरिक आयोजन ने पूरे क्षेत्र को सांस्कृतिक उत्सव में बदल दिया।

परंपरा की झलक: नृत्य, गीत और वाद्य यंत्रों की गूंज

प्रतिभागियों ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की। DJ की धुनों के साथ मांदर और नगाड़ा की थाप ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया।

युवक-युवतियों के सामूहिक नृत्य और गीतों ने पूरे आयोजन को आकर्षक बना दिया, जहां चारों ओर सांस्कृतिक गर्व और एकता का दृश्य देखने को मिला।

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