ठेका मजदूरों को स्थायी करने की लड़ाई तेज, यूनियन की अहम बैठक संपन्न
स्थायी नौकरी, न्यूनतम वेतन और श्रम अधिकारों को लेकर लिए गए कई अहम फैसले
जमशेदपुर:
झारखंड असंगठित मजदूर यूनियन ने स्थाई एवं लगातार चलने वाले कार्यों में लगे ठेका मजदूरों को स्थाई करने की लड़ाई को तेज करने का फैसला लिया है। इसी कड़ी में 22 मार्च 2026 को सुबह 10 बजे गोलमुरी स्थित भोजपुरिया साहित्य भवन, कौशल किशोर सभागार में यूनियन की एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधि मंडल बैठक आयोजित की गई।
बैठक में शामिल हुए कई प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता
इस बैठक में विशिष्ट अतिथि के रूप में अरविंद विद्रोही उपस्थित रहे। वहीं अतिथि के रूप में कामरेड नागराजू, जागो संगठन से सुमंत मुखी, रवि मुखी एवं अनिल बाल्मीकि ने भी भाग लिया।
ठेका प्रथा को अवैध घोषित करने की मांग
बैठक में सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें प्रमुख रूप से स्थाई एवं लगातार चलने वाले कार्यों में ठेका प्रथा को अवैध एवं दंडनीय अपराध घोषित किया जाए और ऐसे कार्यों में लगे सभी ठेका मजदूरों को स्थायी किया जाए।
ठेका मजदूरों को हाजिरी कार्ड, पेमेंट स्लिप, गेट पास, अर्जित अवकाश, कैजुअल अवकाश, धार्मिक त्योहार अवकाश, ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की गई।
चार नए श्रम कोड के खिलाफ आंदोलन की तैयारी
बैठक में केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे चार नए श्रम कोड पर भी गंभीर चिंता जताई गई। यूनियन का कहना है कि 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले इन श्रम कोड से मजदूरों के कई कानूनी अधिकार समाप्त हो सकते हैं।
इस मुद्दे पर यूनियन ने निर्णय लिया कि मजदूरों को संगठित कर चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा, ताकि उनके अधिकारों की रक्षा की जा सके।
इस बैठक में मुख्य रूप से सुनीता मुर्मू, भरत बहादुर, नरसिंह राव, संतोष सेठ, सोमवारी सोए, जमील खान, शांति मुखी, लवन मुखी, करना हेंब्रम, रामदास करूवा, उमेश मुखी, निरज मुखी, अमित ठाकुर, संतोष मुखी, राजकुमार मुखी सहित कई अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।