ईचागढ़, 03 मार्च: गौरांगकोचा स्थित पारगाना कार्यालय में मंगलवार को 'आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था' के बैनर तले 65 गांवों के संथाल समाज के माझी बाबाओं की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। पारगाना शिलु सारना की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में पेसा (PESA) नियमावली के जमीनी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई और वर्तमान स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त किया गया। ग्रामसभा की अवहेलना का आरोप बैठक में उपस्थित माझी बाबाओं ने राज्य प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पेसा नियमावली लागू होने के बावजूद सरकारी अधिकारी और कर्मचारी इस कानून को दरकिनार कर रहे हैं। बिना ग्रामसभा की अनिवार्य स्वीकृति और पेसा प्रावधानों के पालन के ही गांवों में योजनाओं को सीधे थोपा जा रहा है, जो पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था की स्पष्ट अवहेलना है। BDO के पत्र पर आपत्ति प्रतिनिधियों ने ईचागढ़ बीडीओ द्वारा 19 फरवरी 2026 को जारी पत्रांक संख्या 254 पर कड़ी आपत्ति जताई। आरोप है कि गैर-रूढ़ि परंपरा से निर्वाचित प्रधानों को बुलाकर एक निजी कंपनी के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्वशासन प्रमुखों ने इसे पांचवीं अनुसूची और पेसा की मूल भावना के विरुद्ध बताया। महत्वपूर्ण प्रस्ताव और निर्णय: राज्यपाल को भेजी जाएगी सूची: सभी 65 गांवों के पारंपरिक माझी बाबाओं की सूची तैयार की जाएगी। पारगाना शिलु सारना द्वारा सत्यापन के बाद इसे झारखंड सरकार और राज्यपाल को भेजा जाएगा। 'प्रधान' नहीं, 'माझी बाबा' ही पहचान: काटघोड़ा के माझी बाबा गणेश बेसरा के प्रस्ताव पर सर्वसम्मति बनी कि पारंपरिक स्वशासन प्रमुखों के लिए "प्रधान" शब्द स्वीकार्य नहीं है; उन्हें उनके पारंपरिक नाम "माझी बाबा" से ही मान्यता दी जाए। अवैध कब्जे पर ग्रामसभा का चाबुक: पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में ग्रामसभा की भूमि पर किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे, गुप्त बंदोबस्ती या सीएनटी (CNT) एक्ट के उल्लंघन को ग्रामसभा स्वयं निरस्त करेगी और दोषियों पर वैधानिक कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। 15 मार्च को अगली बड़ी बैठक आंदोलन को विस्तार देते हुए आगामी 15 मार्च (रविवार) को गौरांगकोचा में पुनः बैठक बुलाई गई है, जिसमें 100 से अधिक माझी बाबाओं के जुटने की संभावना है। आज की बैठक में मुख्य रूप से माझी बाबा गणेश बेसरा, घनश्याम मुर्मू, अंजीत किस्कु, ललित मार्डी, बोनोमाली हेंब्रम सहित कई पारंपरिक प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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