कुड़मी ST मांग पर आदिवासी नेता लक्ष्मीनारायण मुंडा का तीखा विरोध



“यह मूल आदिवासियों के हक और आरक्षण पर सीधा असर डालेगा” : मुंडा 
रांची: राजधानी रांची के प्रभात तारा मैदान में आयोजित कुड़मी अधिकार महारैली के बाद झारखंड में सामाजिक और राजनीतिक बहस तेज हो गई है। जहां कुड़मी (महतो) समुदाय ने अनुसूचित जनजाति (ST) सूची में शामिल किए जाने की मांग दोहराई, वहीं आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मीनारायण मुंडा ने इस मांग का कड़ा विरोध जताया है।
एक इंटरव्यू में मुंडा ने कहा कि कुड़मी समुदाय की ST में शामिल होने की मांग “अनुचित और आधारहीन” है। उनका तर्क है कि ST श्रेणी केवल सामाजिक पहचान का मामला नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आरक्षण, जमीन की सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि यदि किसी बड़े गैर-जनजातीय समूह को ST सूची में जोड़ा जाता है, तो इससे मौजूदा आदिवासी समुदाय की हिस्सेदारी प्रभावित होगी।

ऐतिहासिक दावों पर उठाए सवाल!
मुंडा ने कुड़मी समुदाय के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा जाता है कि वे ऐतिहासिक रूप से आदिवासी रहे हैं। उन्होंने संथाल विद्रोह, कोल विद्रोह, भूमिज विद्रोह और अन्य आदिवासी आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्रमुख संघर्षों में कुड़मी समाज की निर्णायक भूमिका के ठोस ऐतिहासिक प्रमाण सामने नहीं आए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐतिहासिक तथ्यों की पुष्टि दस्तावेजों और आधिकारिक अभिलेखों से होनी चाहिए, न कि केवल मौखिक दावों से।

दोहरे मानदंड का आरोप!
लक्ष्मीनारायण मुंडा ने यह आरोप भी लगाया कि पहले ST आरक्षण से जुड़े कुछ प्रावधानों का विरोध करने के बाद अब ST में शामिल होने की मांग करना “दोहरे मानदंड” को दर्शाता है। उनका कहना है कि संवैधानिक प्रावधानों को राजनीतिक दबाव या वोट बैंक की राजनीति के आधार पर नहीं बदला जाना चाहिए।

सामाजिक संतुलन का मुद्दा!
हालांकि उन्होंने किसी समुदाय विशेष के खिलाफ बयान देने से परहेज किया, लेकिन कहा कि यदि आदिवासी समाज के आरक्षण और संवैधानिक अधिकारों पर प्रभाव पड़ता है, तो उसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।
मुंडा ने कहा कि आदिवासी समाज ने ऐतिहासिक रूप से अपने अधिकार संघर्ष के माध्यम से हासिल किए हैं और आगे भी आवश्यकता पड़ने पर संवैधानिक ढंग से अपनी आवाज उठाएगा।

झारखंड में यह मुद्दा अब केवल एक रैली तक सीमित नहीं रह गया है। आने वाले दिनों में यह बहस राजनीतिक और कानूनी स्तर पर और गहराने की संभावना है।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने