मुख्यमंत्री की बातों से देवी-देवताओं का अपमान या तार्किक सवाल?
इन बातों से भाजपा में इतना हाय-तौबा क्यों?
रांची।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हालिया विधानसभा भाषण को लेकर राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री पर हिंदू देवी-देवताओं के संदर्भ में कथित आपत्तिजनक बातें कहने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया है। इस मुद्दे को लेकर भाजपा में मामला गरमाया हुआ है।
पार्टी नेताओं ने सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक विरोध दर्ज कराया है और कई स्थानों पर मुख्यमंत्री के पुतले भी जलाए गए हैं।
हालांकि, मुख्यमंत्री की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इसी बीच, पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के एक पुराने भाषण का हवाला दिया है। महतो ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि पासवान ने 11 अगस्त 1982 को लोकसभा में मंडल आयोग पर चर्चा के दौरान अपने भाषण में सरस्वती और लक्ष्मी पूजा सहित कई धार्मिक मान्यताओं पर तीखी टिप्पणियां की थीं।
महतो ने सवाल उठाया कि उस समय ऐसे बयानों पर व्यापक विरोध क्यों नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि रामविलास पासवान देश के वरिष्ठ नेता रहे हैं और एनडीए सरकार में मंत्री भी रहे, जबकि वर्तमान में उनके पुत्र चिराग पासवान भी केंद्र सरकार में मंत्री हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस मुद्दे ने राज्य में सियासी बहस को और तेज कर दिया है। तो इधर एक तरफ लोग कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री ने किसी भी धर्म का अपमान नहीं, बल्कि तार्किक बातें कही हैं, लेकिन भाजपा इसे राजनीतिक हवा दे रही है।