सरायकेला-खरसावां: जिला प्रशासन ने बालू माफियाओं के खिलाफ अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है उपायुक्त नितिश कुमार सिंह के निर्देश पर सोमवार को चांडील अनुमंडल अंतर्गत तिरुलडीह थाना क्षेत्र में अवैध बालू खनन, भंडारण और परिवहन के विरुद्ध सघन छापेमारी अभियान चलाया गया। इस कार्रवाई ने क्षेत्र के बालू सिंडिकेट में हड़कंप मचा दिया है।
38 हजार घनफीट बालू जब्त, रास्तों को किया गया ध्वस्त
जिला खनन विभाग और तिरुलडीह थाना प्रभारी के संयुक्त नेतृत्व में तिरुलडीह, सिरकाडीह, सापदा और सपारूम बालू घाटों पर औचक निरीक्षण किया गया। सपारूम घाट के पास जांच टीम को अवैध रूप से भंडारित लगभग 38,000 घनफीट बालू मिला, जिसे मौके पर ही विधिवत जब्त कर लिया गया। हालांकि छापेमारी के दौरान घाटों पर खनन की सक्रिय गतिविधि नहीं मिली, लेकिन तिरुलडीह और सिरकाडीह घाटों पर वाहनों के टायरों के ताजे निशान पाए गए। इसे देखते हुए प्रशासन ने भविष्य में चोरी रोकने के लिए परिवहन मार्गों पर गहरे ट्रेंच (गड्ढे) खुदवाकर रास्तों को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है।
पांचवीं अनुसूची और पेसा नियमावली की उड़ रही धज्जियां
यह कार्रवाई तो सिर्फ एक बानगी है, लेकिन असल सवाल जिला प्रशासन की कार्यशैली और माफियाओं के दुस्साहस पर खड़ा होता है, सरायकेला-खरसावां एक पांचवीं अनुसूची क्षेत्र है, जहां जल, जंगल और जमीन पर ग्राम सभाओं के अधिकार सुनिश्चित करने के लिए 'पेसा (PESA) नियमावली' लागू है। नियमतः इन क्षेत्रों में संसाधनों के प्रबंधन में स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी अनिवार्य है, लेकिन हकीकत इसके उलट है।
बालू माफिया पेसा कानूनों को ठेंगा दिखाकर प्राकृतिक संसाधनों की लूट मचा रहे हैं, 38 हजार घनफीट बालू तो महज एक हिस्सा है, जो पकड़ा गया न जाने ऐसे कितने अवैध डंपिंग यार्ड और घाट हैं, जहां रात के अंधेरे में मशीनों से नदियां छलनी की जा रही हैं, स्थानीय लोगों का आरोप है कि माफियाओं के तार बहुत गहरे हैं, जो संवैधानिक सुरक्षा कवच वाले इन क्षेत्रों में बेखौफ होकर अवैध कारोबार चला रहे हैं। उपायुक्त ने सख्त चेतावनी दी है कि यह अभियान निरंतर जारी रहेगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
