दुमका : झारखंड के दुमका जिले में संथाल परगना कॉलेज चौक पर आज आदिवासी छात्रों और सामाजिक संगठनों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कई आदिवासी नेताओं के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हेमंत सोरेन का पुतला दहन करते हुए "आदिवासी नेता मुर्दाबाद" के नारे लगाए और सूर्या हांसदा के कथित फर्जी एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग की।
छात्र नेता श्यामदेव हेंब्रम ने मीडिया को बताया कि झारखंड के निर्माण का उद्देश्य आदिवासी मूलवासियों के हितों की रक्षा करना था, लेकिन वर्तमान सरकार आदिवासियों के शोषण और फर्जी एनकाउंटर में शामिल है, उन्होंने कहा, आदिवासियों ने हेमंत सोरेन और उनके परिवार को सत्ता में पहुंचाया, लेकिन आज वही सरकार आदिवासियों पर अत्याचार कर रही है, सूर्या हांसदा के फर्जी एनकाउंटर ने 500 बच्चों का भविष्य अंधकारमय कर दिया, हम मांग करते हैं कि इस मामले की तत्काल सीबीआई जांच हो और दोषी पुलिस अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त किया जाए जाने की मांग किए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि 28 अगस्त तक चल रहे विधानसभा सत्र में आदिवासी विधायकों और सांसदों ने इस मुद्दे को नहीं उठाया, तो संथाल परगना के 18 विधायकों और सांसदों को गांवों में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, "विपक्ष इस मुद्दे को उठा रहा है, लेकिन सत्ताधारी नेता चुप हैं यह आदिवासियों के साथ विश्वासघात है।
छात्र समिति ने 1 सितंबर को पूरे झारखंड में जन आक्रोश महारैली की घोषणा की है साथ ही, यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो झारखंड में आर्थिक नाकाबंदी की जाएगी, जिसमें कोयला, खनिज, बालू और मिट्टी की ढुलाई रोकी जाएगी हेंब्रम ने कहा, "सेवा से जुड़े लोगों को छूट दी जाएगी, लेकिन पुलिस और प्रशासन को जवाबदेह बनाया जाएगा।
यह प्रदर्शन सूर्या हांसदा के कथित फर्जी एनकाउंटर और आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ चल रहे आंदोलन का हिस्सा है। प्रदर्शनकारियों ने हेमंत सोरेन सरकार पर आदिवासियों के हितों की अनदेखी और घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।

