जमशेदपुर : टाटानागर रेलवे स्टेशन पर आज आदिवासी कल्याण छात्रावास के छात्र परिवार और संघर्ष के समस्त साथियों ने संजीव मूर्मु का भव्य स्वागत किया। संजीव ने लोकसभा की कार्यवाही में संथाली भाषा के अनुवादक के रूप में महत्वपूर्ण योगदान देकर आदिवासी समाज का गौरव बढ़ाया है। उनके इस प्रयास से संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में लोकसभा की कार्यवाही उपलब्ध हो सकेगी।
संजीव जी का यह कदम न केवल संथाली भाषा को सम्मान दिलाता है, बल्कि भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को भी समृद्ध करता है। उनके योगदान से आदिवासी समाज में नई प्रेरणा जगी है, और यह अन्य आदिवासी भाषाओं जैसे हो, मुंडा आदि को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
आदिवासी कल्याण छात्रावास के सदस्यों ने संजीव मुर्मू के इस उपलब्धि को गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि उनका यह कार्य युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उनके प्रयासों की सराहना की।


