सरायकेला-खरसावां : संताल सारना उमूल कालिकापुर, गम्हरिया संताली भाषा और ओल चिकी लिपि में पठन-पाठन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण सामूहिक चर्चा का आयोजन किया गया। यह बैठक माननीय सिञ दिशोम देश पारगाना फकीर मोहन टुडू की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई, बैठक में सरायकेला खरसावां जिले के सभी संताल बहुल गांवों में ओल चिकी शिक्षण केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया, साथ ही, प्राइमरी स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक संताली भाषा की पढ़ाई ओल चिकी लिपि में करने के लिए विशेष अभियान चलाने और शीघ्र ही इसकी कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति बनी।
मुख्य वक्ता के रूप में देश पारगाना फकीर मोहन टुडू ने कहा कि ओल चिकी लिपि के बिना संताली भाषा, साहित्य और समाज का विकास संभव नहीं है, पीड़ पारगाना राजेश टुडू ने जोर देकर कहा कि अपनी पहचान और अस्तित्व को बचाए रखने के लिए संताली भाषा, शिक्षा और ओल चिकी लिपि अत्यंत आवश्यक हैं।
सोखेन हेम्ब्रम ने आधुनिकता की चकाचौंध और विकास की अंधी दौड़ में बच्चों में सामाजिक और नैतिक ज्ञान के अभाव पर चिंता जताते हुए कहा कि ओल चिकी लिपि इस कमी को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आदिम डेवलपमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष बाबुराम सोरेन ने जोर दिया कि सरकार भले ही इस दिशा में प्रयास करे या न करे, समाज को स्वयं अपनी भाषा, शिक्षा और ओल चिकी लिपि का प्रचार-प्रसार करना चाहिए।
इस बैठक में लास्कार टुडू, भागवत बासके, जोगेन्दर मार्डी, देव मार्डी सहित चालीस गांवों के माझी हाड़ाम और विचारक उपस्थित रहे। यह चर्चा संताली भाषा और संस्कृति के संरक्षण व विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


