झारखंड : झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री एनोस एक्का एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं, छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) के उल्लंघन और आदिवासी जमीन से जुड़े घोटाले के मामले में सीबीआई कोर्ट में सुनवाई तेज हो गई है, इस मामले में एनोस और उनकी पत्नी मेनन एक्का पर आदिवासी जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त के गंभीर आरोप हैं, सीबीआई ने इस मामले में 2010 में प्राथमिकी दर्ज की थी और 2012 में चार्जशीट दाखिल की थी, हाल ही में, 27 जनवरी 2025 को रांची की विशेष सीबीआई कोर्ट में आरोपियों के बयान दर्ज किए गए, जिसके बाद इस मामले में फैसला जल्द आने की संभावना है।
सीएनटी एक्ट उल्लंघन: क्या है मामला?
छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट), 1908, आदिवासियों की जमीन की सुरक्षा के लिए बनाया गया था, जो गैर-आदिवासियों द्वारा आदिवासी जमीन की खरीद पर सख्त पाबंदी लगाता है, इसके तहत, आदिवासी जमीन का हस्तांतरण केवल उसी थाना क्षेत्र के आदिवासी को किया जा सकता है, एनोस एक्का पर आरोप है कि उन्होंने अपने मंत्रिपद का दुरुपयोग कर फर्जी पते और दस्तावेजों का उपयोग करके रांची के हिनू, ओरमांझी, नेवरी, और चुटिया जैसे क्षेत्रों में आदिवासी जमीनें खरीदीं। यह जमीनें उनकी पत्नी मेनन एक्का के नाम पर या उनकी कंपनी, एक्का कंस्ट्रक्शन, के जरिए अर्जित की गईं। सीबीआई की जांच में सामने आया कि इन सौदों में नियमों की अनदेखी की गई और आदिवासी समुदाय के अधिकारों का हनन हुआ।
जमीन घोटाले की परतें!
एनोस एक्का पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल (2006-2008) के दौरान ग्रामीण विकास विभाग के ठेकों का लाभ अपनी पत्नी की कंपनी को दिलवाया, इन ठेकों से अर्जित धन को आदिवासी जमीन की खरीद में निवेश किया गया, सीबीआई के अनुसार, रांची और सिमडेगा में उनकी संपत्तियों में कई बेनामी संपत्तियां शामिल हैं, जिनमें रांची का एक आलीशान बंगला भी है, जो अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का जोनल कार्यालय बन चुका है, जांच में यह भी सामने आया कि इन सौदों में स्थानीय अधिकारियों और भू-माफियाओं की मिलीभगत थी, जिसने इस घोटाले को और जटिल बना दिया।
सीबीआई ने 2010 में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी और 2012 में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें एनोस और मेनन एक्का के खिलाफ सबूत पेश किए गए। जांच में 56 गवाहों के बयान और 116 बिक्री पत्रों को आधार बनाया गया। इसके अलावा, ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के तहत इस मामले की जांच की और 2020 में एनोस को सात साल की सजा सुनाई गई थी, हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2023 में उन्हें जमानत दे दी थी।
सीएनटी एक्ट और झारखंड में जमीन घोटालों का इतिहास!
झारखंड में सीएनटी और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (एसपीटी) जैसे कानूनों के बावजूद आदिवासी जमीनों की अवैध खरीद-फरोख्त का सिलसिला लंबे समय से जारी है, विशेषज्ञों का मानना है कि सीएनटी एक्ट में थाना क्षेत्र की बाध्यता जैसे प्रावधानों के कारण कई बार आदिवासियों को अपनी जमीन बेचने में कठिनाई होती है, जिसका फायदा भू-माफिया और प्रभावशाली लोग उठाते हैं, एनोस एक्का का मामला इस बात का उदाहरण है कि कैसे सत्ता का दुरुपयोग कर नियमों को तोड़ा जाता है।
वर्तमान स्थिति और भविष्य!
वर्तमान में एनोस एक्का बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार में सजा काट रहे हैं, हालांकि सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत ने उनकी कानूनी स्थिति को कुछ हद तक मजबूत किया है। सीएनटी एक्ट उल्लंघन मामले में सीबीआई कोर्ट का फैसला जल्द आने की उम्मीद है, जो झारखंड में आदिवासी जमीन की सुरक्षा और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
संपादकीय टिप्पणी: यह मामला न केवल एनोस एक्का की व्यक्तिगत जवाबदेही का सवाल उठाता है, बल्कि झारखंड में आदिवासी जमीन की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करता है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि ऐसे घोटालों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि आदिवासी समुदाय के हितों की रक्षा हो सके।

