जमशेदपुर के तालसा में राखी नहीं, धूमधाम से मनाया गया गोम्हा पर्व और विश्व आदिवासी दिवस

जमशेदपुर, 9 अगस्त 2025: सुंदरनगर के तालसा गांव में संथाल आदिवासी समुदाय ने गोम्हा पर्व और विश्व आदिवासी दिवस का समारोह धोरोम आखड़ा में बड़े उत्साह के साथ मनाया। इस अव अवसर पर ग्रामवासियों ने परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ काराम गोसांई की बोंगा बुरु (पूजा) की, जिसमें समस्त गांव ने एकजुट होकर भाग लिया। 

जब देश के अन्य हिस्सों में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा था, तालसा गांव के आदिवासी समुदाय ने अपनी अनूठी सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रखते हुए गोम्हा पर्व मनाया। इस गांव में रक्षाबंधन की जगह गोम्हा पर्व को विशेष महत्व दिया जाता है। 

माझी बाबा दुर्गा चरण मुर्मू, नायके बाबा हाबीराम मुर्मू, कुडाम नायके बाबा बिरसा टुडू, पारानिक, गोडेत और जोग माझी के नेतृत्व में काराम डाली की पारंपरिक पूजा-अर्चना की गई और इसे धोरोम आखड़ा में स्थापित किया गया। इसके बाद प्रत्येक घर में पूर्वजों की सेवा और पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ। ग्रामवासियों ने पारंपरिक व्यंजन जैसे जिल पिठा (मांस का पीठा) और जिल लेटो बनाकर सपरिवार आनंद लिया। 

शाम के समय धोरोम आखड़ा में सामूहिक रूप से रिंजा नाच और गान का आयोजन हुआ, जिसमें ग्रामवासियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस आयोजन ने समुदाय की एकता और सांस्कृतिक धरोहर को और मजबूत किया। 

10 अगस्त को बुढ़ी काराम पूजा-अर्चना के साथ गोम्हा पर्व का समापन होगा। इस आयोजन में रघुनाथ टुडू, बाबलू मुर्मू, लखिराम बास्के, डोमान मुर्मू, कारु टुडू, साग्राम मुर्मू, साहेबराम मुर्मू, लखन बेसरा, शिशू मुर्मू, सिमल टुडू, सुपाई हांसदा, बुढ़ान मार्डी सहित कई ग्रामवासियों का विशेष योगदान रहा। 

यह आयोजन न केवल तालसा गांव की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है, बल्कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी समुदाय की एकता और परंपराओं के प्रति उनके गर्व को भी उजागर करता है। 

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