राजनगर : 11 जून 2023 रविवार को TAECS भवन झारखंड के राजनगर में माझी पारगाना महाल, कुचुंग दिशोम के परम्परिक स्वशासन व्यवस्था के माझी बाबा, पीड़ पारगाना बाबा एवं शिक्षाविद, भाषाविद् समाजिक एवं साहित्यिक संगठन एवं ओल चिकी लिपि समर्थकों का एक बैठक सम्पन्न हुई।
इस बैठक में निम्नलिखित बिन्दुओं पर विचार विमर्श हुई -
1. संताली भाषा आठवीं अनुसूची में शामित्र भाषा है। संताली भाषा के लिए ओल चिकी" लिपि का स्वतंत्र लिपि है।
2. साहित्य अकादमी नई दिल्ली ने भी संताली भाषा के लिए ओल चिकी लिपि को ही मान्यता दिया गया।
3. सेन्ट्रल इंस्टीच्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेज (CIL) से संताली ग्रामर को ओलचिकी लिपि में ही प्रकाशित किया गया है।
4. झारखंड में भी संथाली भाषा का पाठ्यपुस्तक, 1 से 5 तक के लिए जे सी ई आ टी द्वारा 2003, 2005, 2007, 2016 एवं 2019 में ओल चिकी लिपि में ही प्रकाशित किया गया है।
5. नई शिक्षा नीति 2020 में एफ एल एन द्वारा संताली भाषा की पाठ्यपुस्तक निर्माण एवं अनुवाद, में ओल चिकी लिपि में अनुवाद हुई है और वर्ग कुछ 3 से 5 तक का गणित एवं पर्यावरण विद्वान संताली भाषा को ओलचिकि में ना कर देवनागरी लिपि में छपवाने का कार्य जे सी.ई.आर टी द्वारा किया जा रहा । इसका पुरजोर विरोध माझी पारगाना महाल के माझी बाबा, पीड़ पारगाना बाबा एवं समस्त समाजिक संगठन विरोध करता है।
5. झारखण्ड सरकार से हमारी मांगे इस प्रकार संथाली भाषा का पठन-पाठन व प्रचार-प्रसार सामग्री ओपचिकी लिपि से तैयार किया जाए एवं प्राथमिक विद्यालय से विश्वविद्यालय तक पढ़ाई अविलंब किया जाए संथाली भाषा को मोषचिकी लिपि से प्राथमिक विद्यालय से विश्वविद्यालयों में पढ़ाने हेतु पद सृजित करते हुए संथाली शिक्षकों की बहाली अविलंब किया जाए। संथाली परम्परा, भाषा संस्कृति का विकास एवं संरक्षण- संवर्धन हेतु झारखंड में संथाली आकादमी का गठन अविलंब किया जाए।
संथाली भाषा संविधान की आठवी अनुसूची में शामिल है इसलिए झारखंड प्रदेश में प्रथम राजभाषा का दर्जा अविलंब दिया जाए जाने की भी मांग उठी।
बैठक में मुख्य रूप से नवीन मुर्मू, सुनील सोरेन, जयराम मुर्मू, मुतरू मुर्मू आदि काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।

