AADIM JUMID NEWS : 11 जून 2023 को स्थान- पाथोरगोड़ा ग्राम जाहेर गाढ़, मुसाबनी पूर्वी सिंहभूम में आदिवासी की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था माझी परगना महाल का पारगना दाहड़ी चाल (पारगना पागड़ी , ताजपोशी) कार्यक्रम संपन्न हुआ।
विदित हो कि आदिवासी परंपरिक स्वशासन व्यवस्था संथाल समाज का संचालन माझी बाबा एवं परगाना बाबा द्वारा किया जाता है। धाड़ दिशोम अंतर्गत पावड़ा तोरोप के परगना बाबा सनि हांसदा का आकस्मिक निधन के बाद सामाजिक व्यवस्था संचालन में कठिनाई हो रही थी। इसीलिए पारगना वंशज पूर्व पारगना आयो कमला हांसदा के बड़े पुत्र श्री सुखदेव हांसदा के पुत्र रवि हांसदा को निवर्तमान तोरोप परगाना घोषित करते हुए (दाहड़ी चाल) ताजपोशी किया गया।
इस अवसर पर देश पारगाना बैजू मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। पारगना बाबा ने कहा कि आदिवासी पारंपारिक स्वशासन व्यवस्था संथाल समाज का रीति रिवाज संरक्षण संवर्धन हेतु तोरोप पारगना बाबा का दायित्व महत्वपूर्ण है, गांव एवं समाज का विकास के लिए प्रत्येक परगना बाबा को समाज सेवा की भावना जागृत करना होगा एवं समाज के सर्वांगीण विकास हेतु कार्यक्रम को संचालित करना होगा। वर्तमान में आदिवासी संथाली भाषा का ओलचिकी लिपि कठिनाई के दौर से गुजर रहा है। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत मातृ भाषा से शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार सबको मिला है। इसी संदर्भ में झारखंड सरकार प्राथमिक स्तर का पठन-पाठन सामग्री तैयार कर रही है। झारखंड प्रदेश में पूर्व से ही पठन-पाठन सामग्री संथाली भाषा का ओलचिकी लिपि से तैयार किया जा चुका है, अब सिर्फ गणित एवं पर्यावरण विषय का किताब छापना बाकी है, जो शिक्षा विभाग झारखंड द्वारा देवनागरी लिपि में छपने की तैयारी की जा रही है जो ओलचिकी लिपि का अपमान है। संथाल समाज इसका घोर निंदा करते हुए पुरजोर विरोध करता है। और संकल्प लिया गया कि संथाली भाषा के लिए ओलचिकी लिपि के अलावा कोई दूसरा लिपि मंजूर नहीं है , इस संबंध में कई दौर की बैठक मुख्यमंत्री झारखंड तथा शिक्षा विभाग निदेशक से भी वार्ता हो चुकी है, मगर अब तक सकारात्मक परिणाम नहीं आया है , इसलिए संथाल समाज के सर्वसंगठनिक मान्यता समाजिक संगठन "ओलचिकी हूल बैसी" द्वारा राज्य सरकार को 27 जून तक का अल्टीमेटम दिया गया है। अगर हमारी मांगे पूरी नहीं होती है तो हम 4 जुलाई 2023 को संपूर्ण झारखंड बंद करने की घोषणा किया जा चुका है, जिसका तैयारी पूरे झारखंड में संथाल परगना से लेकर कोल्हान तक चल रही है। अब भी समय है सरकार उचित पहल करते हुए हमारी मांगे पूरी करें।
हमारी मांगे इस प्रकार है-
1, झारखंड प्रदेश में प्राथमिक स्तर पर संताली भाषा का ओल चिकी लिपि से पठन-पाठन कार्य अविलंब आरंभ हो।
2, संताली भाषा ओलचिकी लिपि से पढ़ाने के लिए शिक्षकों की अविलंब बहाली हो।
3, संथाली भाषा एवं संस्कृति प्रचार-प्रसार ,संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संताली अकादमी का गठन अविलंब किया जाए ।
4, आठवीं अनुसूची में शामिल संताली भाषा को झारखंड प्रदेश में राज्य भाषा का दर्जा अविलंब दिया जाए।
कार्यक्रम में तोरोप पारगना बाबा दसमत हांसदा, हरिपोदो मुर्मू, कुनाराम मुर्मू, मानिज पुनता मुर्मू , लखन मार्डी, पारानिक मधू सोरेन, पंचानन सोरेन, माझी बाबा दुर्गा चरण मुर्मू, सुदर्शन हांसदा, सुखदेव हांसदा, बहादूर सोरेन, फागू किस्कू, मानिज करुणा मुर्मू, मोकरो हांसदा, बिन्दे सोरेन, दसमत मुर्मू, बिरेन टुडू अदि काफी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।


