परिसीमन पर आदिवासी संगठनों का बड़ा विरोध, बोले- ST सीटों में कटौती हुई तो होगा व्यापक आंदोलन

रांची: परिसीमन के मुद्दे पर झारखंड में सियासी और सामाजिक हलचल तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में 3 जुलाई (शुक्रवार) को रांची प्रेस क्लब में विभिन्न आदिवासी संगठनों और आदिवासी सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर परिसीमन के नाम पर अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षित सीटों में संभावित कटौती का कड़ा विरोध जताया।

वक्ताओं ने कहा कि पांचवीं अनुसूची, संविधान के अनुच्छेद 244(1), CNT एक्ट और SPT एक्ट के प्रावधानों का पिछले कई दशकों से प्रभावी ढंग से पालन नहीं किया गया। उनका आरोप है कि विकास परियोजनाओं, भूमि अधिग्रहण, अवैध कब्जों और प्रशासनिक लापरवाही के कारण बड़ी संख्या में आदिवासी अपनी जमीन और संसाधनों से बेदखल हुए, जिसका असर उनकी आबादी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी पड़ा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि यदि जनसंख्या में बदलाव के आधार पर परिसीमन के दौरान ST आरक्षित सीटों में कटौती की जाती है, तो यह आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों के साथ गंभीर अन्याय होगा। वक्ताओं ने मांग की कि पहले पिछले 75 वर्षों में हुए भूमि लूट, विस्थापन और संवैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जवाबदेह बनाया जाए, उसके बाद ही परिसीमन जैसे मुद्दों पर निर्णय लिया जाए।

ये प्रमुख मांगें रखीं

- परिसीमन में किसी भी परिस्थिति में ST आरक्षित सीटों की संख्या कम नहीं की जाए।

- पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में आदिवासी सीटों को फ्रीज करते हुए आवश्यकता अनुसार उनकी संख्या बढ़ाई जाए।

- CNT और SPT एक्ट का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

- पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में गैर-आदिवासी बसावट पर प्रभावी रोक लगाई जाए।

- राज्यपाल अपनी संवैधानिक शक्तियों का पूर्ण उपयोग करें।

- पिछले 75 वर्षों में हुए विस्थापन, भूमि लूट और सांस्कृतिक क्षति की जांच के लिए संसदीय समिति और न्यायिक आयोग का गठन किया जाए तथा प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार की गारंटी दी जाए।

30 अगस्त को मोरहाबादी में होगी महाजुटान महारैली

आदिवासी संगठनों ने 30 अगस्त 2026 (रविवार) को दोपहर 12 बजे रांची के मोरहाबादी मैदान में प्रस्तावित आदिवासी एकता महाजुटान महारैली में अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने की अपील की। वक्ताओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल आरक्षित सीटों की नहीं, बल्कि आदिवासियों की जमीन, संस्कृति, पहचान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में लक्ष्मीनारायण मुंडा, प्रवक्ता अजय तिर्की, शशि पन्ना, रमा खलखो और ग्लैडसन डुंगडुंग ने अपने विचार रखे।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने