171वें हूल दिवस पर जामताड़ा में आदिवासियों का हुंकार, 100 किमी की बाइक महारैली के साथ उठीं बड़ी मांगें

जामताड़ा, 30 जून 2026: 171वें हूल दिवस के अवसर पर भारत दिसोम आदिवासी संघ, जिला जामताड़ा के नेतृत्व में एक भव्य बाइक महारैली का आयोजन किया गया। जिला अध्यक्ष प्रेम मरांडी के नेतृत्व में आयोजित इस महारैली का उद्देश्य वीर शहीद सिद्धू-कान्हू मुर्मू के बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करना, हूल आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाना तथा आदिवासी समाज के अधिकारों और संवैधानिक मांगों के प्रति जनजागरूकता फैलाना था।

महारैली का शुभारंभ जामताड़ा गांधी मैदान स्थित वीर शहीद सिद्धू-कान्हू मुर्मू की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर भारत दिसोम आदिवासी संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेश मुर्मू, केंद्रीय उपाध्यक्ष शिवधन सोरेन, केंद्रीय उपसचिव मिथुन मरांडी, केंद्रीय कोषाध्यक्ष दुर्गा टुडू, केंद्रीय उपकोषाध्यक्ष प्रफुल्ल सोरेन, केंद्रीय सलाहकार बिरेंद्र मुर्मू, केंद्रीय संरक्षक लखन हेंब्रम तथा केंद्रीय सदस्य महेश सोरेन सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।

इसके बाद बाइक महारैली जामताड़ा से निकलकर गोपालपुर, ताबाजोर चौक, बागदाहा, जोलागढ़ा कुसबाह और दुलदुलाई स्थित सिद्धू-कान्हू मुर्मू की प्रतिमाओं पर श्रद्धांजलि अर्पित की। लगभग 100 किलोमीटर की इस यात्रा के बाद महारैली का समापन पुनः जामताड़ा चौक में हुआ।

हूल आंदोलन को बताया 19वीं शताब्दी का सबसे बड़ा जनआंदोलन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत दिसोम आदिवासी संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेश मुर्मू ने कहा कि 30 जून 1855 को वीर शहीद सिद्धू-कान्हू मुर्मू द्वारा शुरू किया गया हूल आंदोलन 19वीं शताब्दी का सबसे बड़ा जनआंदोलन था। उन्होंने कहा कि इसी ऐतिहासिक संघर्ष की बदौलत संथाल परगना की पहचान मजबूत हुई और संथाल परगना टेनेंसी (SPT) अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण कानूनी संरक्षण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

भारत की महामहिम राष्ट्रपति के समक्ष आदिवासी समाज की ओर से कई महत्वपूर्ण मांगें-

- संसद भवन परिसर में वीर शहीद सिद्धू मुर्मू और कान्हू मुर्मू की प्रतिमा स्थापित की जाए।

- झारखंड के सभी विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में संथाली भाषा की शिक्षा प्रभावी रूप से लागू की जाए तथा आवश्यक शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।

- संथाल परगना टेनेंसी (SPT) एक्ट और छोटानागपुर टेनेंसी (CNT) एक्ट का कड़ाई से पालन कराया जाए तथा आदिवासी भूमि के अवैध हस्तांतरण की निष्पक्ष जांच कर पात्र मामलों में भूमि वापस दिलाई जाए।

100 से अधिक बाइक सवार हुए शामिल

इस ऐतिहासिक बाइक महारैली में लगभग 100 से अधिक मोटरसाइकिल सवारों ने भाग लिया। प्रमुख रूप से सोनालाल मरांडी, अफसर सोरेन, संजित किस्कू, अंजय सोरेन, संमत मरांडी, आकाश हेंब्रम, विजय हेंब्रम, बाबुधन टुडू, संदीप बेसरा, बाजुन मरांडी, बिंसू मरांडी (दुमका), लुखिनदर हेंब्रम, मुकेश मरांडी, संजिप हांसदा, अमन हेंब्रम, श्याम हेंब्रम, मंजय मरांडी, बाबुशर मुर्मू, प्रकाश टुडू, सत्यपाल हेंब्रम, लंखिनदर टुडू, श्रीजल मुर्मू सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समाज के लोग मौजूद रहे।

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