SIR समीक्षा बैठक में आदिवासी जमीन और बदलती डेमोग्राफी का मुद्दा उठा, पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने जांच की मांग की

सरायकेला-खरसावां: सरायकेला समाहरणालय में कोल्हान आयुक्त की अध्यक्षता में SIR की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन और ईचागढ़ विधायक सबिता महतो भी शामिल हुईं। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए चम्पाई सोरेन ने जिले के कपाली, आदित्यपुर समेत कई क्षेत्रों में तेजी से हो रहे डेमोग्राफिक बदलाव, खतियानधारियों के नाम वोटर लिस्ट में नहीं होने तथा CNT भूमि से जुड़े मामलों की जांच की मांग उठाई।

चम्पाई सोरेन ने कहा कि सरायकेला-खरसावां जिले के कई इलाकों में हाल के वर्षों में तेजी से डेमोग्राफिक बदलाव हुआ है। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे मामलों के प्रति सचेत करते हुए पूरे मामले की गंभीरता से जांच करने की बात कही।

उन्होंने कहा कि जिन खतियानी भूमिपुत्रों का नाम जमीन के रिकॉर्ड में दर्ज है, यदि उनका नाम SIR के दौरान वोटर लिस्ट में नहीं मिल रहा है, तो इसकी जांच आवश्यक है। उनके अनुसार, मतदान प्रत्येक भारतीय नागरिक का अधिकार है और जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटे हैं, उन्हें आवेदन देकर अपने अधिकार वापस पाने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।

कपाली में CNT जमीन को लेकर उठे सवाल

चम्पाई सोरेन ने कपाली क्षेत्र में CNT जमीन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कपाली में बड़ी मात्रा में CNT भूमि है और अधिकारियों को यह जांच करनी चाहिए कि खतियानधारियों के नाम रिकॉर्ड से क्यों गायब हो रहे हैं तथा जमीन के रिकॉर्ड में किन लोगों के नाम दर्ज हो रहे हैं।

उन्होंने प्रशासन से यह भी जांच करने को कहा कि कहीं CNT कानून का उल्लंघन तो नहीं हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में कानून का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

चम्पाई सोरेन ने यह भी कहा कि CNT एक्ट के तहत आदिवासी और खतियानी जमीनों का संरक्षण जिला उपायुक्त की जिम्मेदारी है। यदि कोई अधिकारी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने में असमर्थ दिखाई देता है, तो प्रभावित लोगों को कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर अपनी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।

हुना माझी की जमीन का मामला भी उठाया

मीडिया से बातचीत के दौरान चम्पाई सोरेन ने एक उदाहरण के तौर पर हुना माझी की जमीन का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, संबंधित जमीन CNT श्रेणी की है और रिकॉर्ड में खातमा खातून का नाम दर्ज होने का मामला सामने आया है।

इस मामले को लेकर उन्होंने अधिकारियों से जांच की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि संबंधित जमीन CNT श्रेणी की है, तो जमीन के रिकॉर्ड में नाम किस आधार पर बदला और मूल खतियानधारी का नाम रिकॉर्ड से कैसे हट गया।

इस पूरे मामले में अब अंचल स्तर से लेकर जिला प्रशासन तक की भूमिका और रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, जमीन के रिकॉर्ड में नाम परिवर्तन और CNT कानून के उल्लंघन से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

2025 में दिए गए आवेदनों की जांच की मांग

चम्पाई सोरेन ने बताया कि कुछ लोगों ने वर्ष 2025 में आवेदन देकर शिकायत की थी कि वे मूल खतियानधारी हैं, लेकिन उनका नाम संबंधित रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो रहा है। उन्होंने अधिकारियों से ऐसे आवेदनों की भी जांच करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित जमीन का मूल खतियान किसके नाम है, वर्तमान रिकॉर्ड में किसका नाम दर्ज है और नाम में बदलाव किस प्रक्रिया एवं आधार पर हुआ।

सबिता महतो की चुप्पी पर भी सवाल

बैठक में ईचागढ़ विधायक सबिता महतो की मौजूदगी के बावजूद आदिवासी जमीन, CNT एक्ट, बदलती डेमोग्राफी और खतियानी भूमिपुत्रों के अधिकार जैसे मुद्दों पर उनकी ओर से मीडिया के सामने कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया।

SIR को लेकर विधायक की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन सवाल यह है कि जब कपाली उनके विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है और क्षेत्र में आदिवासी जमीन तथा पहचान से जुड़े गंभीर सवाल उठ रहे हैं, तो इन मुद्दों पर उनकी स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया कब सामने आएगी?

यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आदिवासी समाज के लिए जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि पहचान, भाषा, संस्कृति, रूढ़ि-प्रथा, परंपरा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी हुई है।

यदि CNT भूमि के संरक्षण में कहीं लापरवाही या कानून का उल्लंघन हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग लगातार उठती रही है। इसी तरह, यदि किसी खतियानधारी का नाम वास्तव में वोटर लिस्ट से हटाया गया है, तो उसके कारणों की जांच कर उचित प्रक्रिया के तहत समाधान किया जाना भी जरूरी है।

प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर

SIR की समीक्षा बैठक के बाद अब कई सवाल प्रशासन के सामने हैं। क्या खतियानी भूमिपुत्रों के नाम वोटर लिस्ट से हटने की शिकायतों की जांच होगी? क्या CNT भूमि से जुड़े रिकॉर्ड में हुए बदलावों की पड़ताल की जाएगी? क्या कपाली और आदित्यपुर समेत जिले के अन्य क्षेत्रों में हो रहे डेमोग्राफिक बदलाव को लेकर प्रशासन कोई ठोस अध्ययन या कार्रवाई करेगा? और क्या संबंधित जनप्रतिनिधि इन मुद्दों पर खुलकर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे?

फिलहाल, चम्पाई सोरेन ने जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग प्रशासन के सामने रख दी है। अब नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई और संबंधित जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया पर है।

आदिवासी जमीन, अधिकार और अस्तित्व से जुड़े ऐसे ही महत्वपूर्ण मुद्दों की खबरों के लिए पढ़ते और देखते रहिए — Aadim Jumid News।

जोहार।

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