नई दिल्ली, 23 जून 2026: राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में झारखंड आंदोलन के महानायक और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संरक्षक रहे दिशोम गुरू शिबू सोरेन को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक पद्म भूषण से मरणोपरांत सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी पत्नी रूपी सोरेन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों प्राप्त किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित अनेक गणमान्य हस्तियां उपस्थित थीं।
समारोह में शिबू सोरेन की बड़ी पुत्री अंजलि सोरेन तथा गांडेय विधायक कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति के योगदान की पहचान नहीं, बल्कि झारखंड की पहचान, आदिवासी अस्मिता और दशकों लंबे जनसंघर्ष को राष्ट्रीय स्तर पर मिली स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है।
संघर्षों से गढ़ी गई एक असाधारण यात्रा
11 जनवरी 1944 को झारखंड के रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में जन्मे शिबू सोरेन का जीवन संघर्षों से भरा रहा। महज 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने पिता को साहूकारों द्वारा की गई हत्या में खो दिया। यह घटना उनके जीवन का निर्णायक मोड़ बनी और यहीं से शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ उनका संघर्ष शुरू हुआ।
उन्होंने आदिवासियों, किसानों, मजदूरों और वंचित समुदायों के अधिकारों के लिए आवाज बुलंद की। साहूकारी प्रथा, जमीन की लूट और सामाजिक अन्याय के खिलाफ उनका आंदोलन धीरे-धीरे जनआंदोलन में बदल गया।
झारखंड आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार
शिबू सोरेन उन नेताओं में शामिल रहे जिन्होंने अलग झारखंड राज्य के निर्माण के लिए दशकों तक संघर्ष किया। झारखंड आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने और उसे राजनीतिक ताकत में बदलने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही।
15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य के गठन के पीछे जिन नेताओं का सबसे बड़ा योगदान माना जाता है, उनमें शिबू सोरेन का नाम अग्रणी रूप से लिया जाता है। उनके नेतृत्व ने झारखंडी पहचान और अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी।
राजनीति में मजबूत पहचान
शिबू सोरेन ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। इसके अलावा उन्होंने आठ बार दुमका लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर जनता का विश्वास हासिल किया।
राजनीति में उनका प्रभाव केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी वे आदिवासी समाज की एक मजबूत आवाज के रूप में पहचाने गए।
अगस्त 2025 में हुआ निधन
लंबी बीमारी से जूझने के बाद 4 अगस्त 2025 में 81 वर्ष की आयु में शिबू सोरेन का निधन हो गया। उनके निधन से झारखंड की राजनीति और सामाजिक आंदोलन के एक युग का अंत माना गया।
पद्म भूषण पर व्यापक स्वागत
शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण दिए जाने की घोषणा और सम्मान समारोह के बाद झारखंड सहित पूरे देश में उनके समर्थकों ने खुशी व्यक्त की। झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने इसे झारखंड के गौरव और आदिवासी समाज के सम्मान से जोड़कर देखा।
कई नेताओं ने कहा कि यह सम्मान उस व्यक्ति को समर्पित है जिसने अपना पूरा जीवन समाज के कमजोर वर्गों, आदिवासियों और झारखंड की पहचान के लिए संघर्ष करते हुए बिताया।
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