झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026: बैद्यनाथ राम और परिमल नाथवानी की जीत, कांग्रेस को बड़ा झटका



रांची: झारखंड में 18 जून को दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजे भी घोषित हो चुके हैं। इस चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के बीच कड़ी राजनीतिक मुकाबले के बाद दो उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा।

इस चुनाव में कुल तीन उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम, NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी और कांग्रेस के प्रणव झा शामिल थे।

चुनाव का परिणाम ये रहा 
राज्यसभा चुनाव के अंतिम परिणामों के अनुसार, झामुमो उम्मीदवार बैद्यनाथ राम को 30 वोट प्राप्त हुए, जबकि एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को 28 वोट मिले। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 20 वोटों से संतोष करना पड़ा और उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

बैद्यनाथ राम — 30 वोट

परिमल नाथवानी — 28 वोट

प्रणव झा — 20 वोट


क्रॉस-वोटिंग बनी चर्चा का विषय
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में क्रॉस-वोटिंग की चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि NDA समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी को अपेक्षा से अधिक समर्थन मिला, जिसने चुनावी समीकरण बदल दिए। कुछ वोटों के अमान्य होने की भी जानकारी सामने आई है।

कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार को सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर समन्वय की कमी और विधायकों के क्रॉस-वोटिंग से जोड़कर देखा जा रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण था यह चुनाव?
झारखंड की ये दोनों राज्यसभा सीटें राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही थीं। इनमें से एक सीट पूर्व राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त होने के कारण रिक्त हुई थी, जबकि दूसरी सीट पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई थी।

इसी वजह से इस चुनाव पर पूरे राज्य की राजनीतिक पार्टियों और जनता की नजरें टिकी हुई थीं।


झारखंड की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?
राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने झारखंड की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे दिया है। एक ओर झामुमो ने अपनी सीट बचाने में सफलता हासिल की, वहीं दूसरी ओर NDA समर्थित उम्मीदवार की जीत ने विपक्षी खेमे को मजबूती दी है।

कांग्रेस के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय बन सकता है, जबकि क्रॉस-वोटिंग की अटकलों के बीच आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति और अधिक गर्माने की संभावना है।

अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक दल अपने भीतर उभरे सवालों और असंतोष से कैसे निपटते हैं।

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