रांची: 18 मई 2026 को आदिवासी भूमिज मुंडा चुआड़ सेना के एक प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर लोकभवन परिसर में कथित रघुनाथ महतो प्रतिमा स्थापना के मुद्दे पर अपनी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। प्रतिनिधिमंडल ने इस दौरान प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ जगदीश चन्द्र झा द्वारा लिखित पुस्तक “भूमिज रिवॉल्ट”, आदिवासी अंगवस्त्र एवं गुलदस्ता भेंट कर सम्मान प्रकट किया।
लोकभवन परिसर में प्रतिमा भेंट को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल महोदय को अवगत कराया कि 13 मई 2026 को पूर्व सांसद Shailendra Mahato द्वारा लोकभवन परिसर में रघुनाथ महतो की प्रतिमा भेंट कर माल्यार्पण किया गया था, जिसे भूमिज समाज ने अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं असंवेदनशील कदम बताया।
चुआड़ सेना के अध्यक्ष मानिक सरदार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कार्य आदिवासी भूमिज समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है तथा समाज के बीच अनावश्यक विवाद उत्पन्न करने का प्रयास प्रतीत होता है।
“मामला न्यायालय में विचाराधीन, फिर भी सार्वजनिक सम्मान क्यों?”
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि रघुनाथ महतो से जुड़े इस पूरे विषय पर रांची न्यायालय में मामला विचाराधीन है। ऐसे में लोकभवन जैसे संवैधानिक परिसर में सार्वजनिक रूप से प्रतिमा भेंट करना न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी के समान है।
चुआड़ सेना ने राज्यपाल महोदय से आग्रह किया कि जब तक न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक इस विषय में किसी भी प्रकार की आधिकारिक मान्यता अथवा सार्वजनिक सम्मान पर रोक लगाई जाए।
“रघुनाथ महतो को चुआड़ विद्रोह का महानायक भूमिज समाज नहीं मानता”
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी स्पष्ट किया कि भूमिज समुदाय रघुनाथ महतो को चुआड़ विद्रोह का महानायक नहीं मानता है। इस विषय पर समाज की आपत्ति लंबे समय से बनी हुई है और समुदाय की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक भावनाओं की अनदेखी स्वीकार्य नहीं होगी।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि न्यायालय में लंबित विषयों को दरकिनार कर समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राज्यपाल ने दिया मौखिक आश्वासन
राज्यपाल महोदय के साथ हुई वार्ता के दौरान प्रतिनिधिमंडल को यह मौखिक आश्वासन प्राप्त हुआ कि लोकभवन परिसर में रघुनाथ महतो की प्रतिमा स्थापना को लेकर अब तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
साथ ही, राज्यपाल महोदय ने भूमिज समुदाय की चिंताओं को गंभीरतापूर्वक सुना और संवैधानिक मर्यादा तथा न्यायिक प्रक्रिया के सम्मान का भरोसा दिलाया।
राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें प्रमुख रूप से उठाई गईं—
• न्यायालय के अंतिम निर्णय तक किसी भी प्रकार की आधिकारिक मान्यता या सार्वजनिक सम्मान पर रोक लगाई जाए।
• लोकभवन परिसर की तटस्थता बनाए रखी जाए।
• समाज के विभिन्न पक्षों के साथ विस्तृत संवाद सुनिश्चित किया जाए।
• न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक मर्यादा का पूर्ण सम्मान किया जाए।
प्रतिनिधिमंडल में ये लोग रहे शामिल
इस अवसर पर आदिवासी भूमिज मुंडा चुआड़ सेना के निवारण सरदार, मानिक सरदार, रामु सरदार, निर्मल सरदार, मोनिका भूमिज, पार्वती सरदार, सागर सरदार, विभूति सरदार एवं हरा सरदार सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।
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