कांके में आस्था बनाम विकास: हड़गड़ी भूमि पर STF कैंप विस्तार के खिलाफ ग्रामीणों की भावुक अपील

रांची: आज यानी 4 अप्रैल का दिन कांके प्रखंड के मौजा-टेंडर क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण संवाद का साक्षी बना। यहां प्रस्तावित झारखंड जगुआर कैंप विस्तार को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने अपनी बात मजबूती से रखी—लेकिन विरोध के साथ-साथ संवेदनशीलता और सम्मान का भाव भी उतना ही स्पष्ट था।

आस्था से जुड़ी है हड़गड़ी जमीन
ग्रामीणों ने बताया कि जिस जमीन पर कैंप विस्तार की योजना है, वह कोई साधारण भूमि नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की आस्था का केंद्र—हड़गड़ी स्थल है। यह वह स्थान है जहां वर्षों से पूजा-अर्चना, परंपरागत अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं।
यह सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि पीढ़ियों की पहचान और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

सम्मान के साथ रखा गया पक्ष
इस मुलाकात की खास बात यह रही कि ग्रामीणों ने अपनी मांग को विरोध के रूप में नहीं, बल्कि संवाद और सम्मान के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि समाज की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना के लिए कोई वैकल्पिक स्थान तय किया जाए।

सरहुल पर प्रशासन को धन्यवाद
मुलाकात के दौरान ग्रामीणों ने हाल ही में संपन्न हुए सरहुल पर्व को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन का आभार भी जताया।
यह पहल दिखाती है कि समाज सिर्फ अपनी मांग ही नहीं रखता, बल्कि सकारात्मक कार्यों की सराहना करना भी जानता है।

इस अवसर पर ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों का शॉल ओढ़ाकर और गुलदस्ता भेंट कर सम्मान किया—जो संवाद की गरिमा और आपसी सम्मान का प्रतीक रहा।

कार्यक्रम में अजय तिर्की (केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष) और अमित मिंज (वार्ड पार्षद) समेत कई स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।


एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने