जमशेदपुर: 21 अप्रैल 2026 को सर्किट हाउस, बिस्टुपुर आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था एवं ओल चिकी हूल बैसी के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में स्वशासन व्यवस्था के अगुवा, सामाजिक प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए।
जैक बोर्ड रिजल्ट पर आक्रोश
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य मुद्दा सत्र 2025-26 के जैक बोर्ड द्वारा आयोजित 8वीं कक्षा की परीक्षा के परिणाम को लेकर रहा। आरोप लगाया गया कि झारखंड भर के संथाली भाषा के छात्र-छात्राओं को संथाली विषय में “D ग्रेड” दिया गया है, जबकि अन्य विषयों में उनका प्रदर्शन काफी बेहतर रहा।
इस निर्णय से आदिवासी संथाल समाज में गहरा आक्रोश है। वक्ताओं ने इसे एक सुनियोजित साजिश बताते हुए कहा कि इससे छात्रों का अपनी मातृभाषा से मोहभंग करने की कोशिश की जा रही है।
कॉपी रिचेक और कार्रवाई की मांग
समाज के प्रतिनिधियों ने परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं की भौतिक पुनः जांच (रिचेक) कराने की मांग की गई। साथ ही दोषी पदाधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से हटाने की भी मांग उठाई गई।
शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक बहाली पर सवाल
सम्मेलन में यह भी कहा गया कि संथाली भाषा के प्रचार-प्रसार और विकास के लिए अब तक ठोस प्रयास नहीं किए गए हैं।
पूर्व शिक्षा मंत्री स्वर्गीय रामदास सोरेन द्वारा 10,000 जनजातीय शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन आज तक वह पूरी तरह लागू नहीं हो सकी। इसके कारण छात्रों को पढ़ाई में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
साथ ही स्कूलों में संथाली भाषा की पाठ्य सामग्री उपलब्ध नहीं होने की समस्या भी सामने आई।
ओल चिकी लिपि को लेकर मुख्य मांगें
सम्मेलन में ओल चिकी लिपि को लेकर कई अहम मांगें रखी गईं—
8वीं बोर्ड में संथाली विषय के “D ग्रेड” मामले की उच्च स्तरीय जांच
उत्तरपुस्तिकाओं की पुनः जांच कर रिजल्ट सुधार
ओल चिकी लिपि के शिक्षकों की अविलंब बहाली
सत्र 2026-27 से ओल चिकी लिपि में पढ़ाई शुरू करने की व्यवस्था
संथाली भाषा को राज्य में प्रथम राजभाषा का दर्जा
बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सरकारी कार्यालयों में ओल चिकी लिपि में नाम लिखना अनिवार्य
झारखंड लोक भवन के मुख्य द्वार पर ओल चिकी लिपि में “लोक भवन” अंकित करना
संथाली एकेडमी काउंसिल का शीघ्र गठन
JTET परीक्षा में संथाली भाषा को ओल चिकी लिपि में लिखने की अनुमति
JTET परीक्षा का जल्द आयोजन और अधिसूचना जारी करना
मगही और भोजपुरी को परीक्षा में शामिल न करने की मांग
आंदोलन की चेतावनी
सभी सामाजिक अगुवाओं ने एक स्वर में कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं करती है, तो आदिवासी समाज चरणबद्ध आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जो आगे चलकर उग्र रूप भी ले सकता है।
प्रमुख उपस्थित लोग
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओल चिकी हूल बैसी के महासचिव दुर्गा चरण मुर्मू, माझी बाबा बिंदे सोरेन, कुचूंग दिशोम देश पारानिक नवीन मुर्मू, दुलाल हांसदा, हरिहर टुडू, बाबूराम सोरेन, बुद्धेश्वर किस्कू, डुमका मुर्मू सहित समाज के अन्प्रय तिनिधि मौजूद रहे।
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