बोकारो: 23 मार्च 2026 को आदिवासी सेंगेल अभियान की ओर से बोकारो जिला में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिला उपायुक्त के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन में प्रकृति पूजक आदिवासियों के लिए संविधान के अनुच्छेद-25 के तहत स्वतंत्र धार्मिक मान्यता यानी “सरना धर्म कोड” लागू करने और जनगणना 2021–2027 में अलग कॉलम की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
जिला उपायुक्त की अनुपस्थिति में यह ज्ञापन समाहरणालय के कार्यालय अधीक्षक सुकुमार प्रसाद मरांडी को सौंपा गया।
आदिवासी सेंगेल अभियान ने अपने ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं:
1️⃣ सरना धर्म को संवैधानिक मान्यता
भारत के लगभग 15 करोड़ आदिवासी, जिन्हें संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है, अब तक अनुच्छेद 25 के तहत अपने धर्म “सरना” को मान्यता नहीं दिला पाए हैं। इसे उनका मौलिक अधिकार बताया गया।
2️⃣ जनगणना 2021–2027 में अलग कोड
अभियान ने सवाल उठाया कि आखिर कब तक आदिवासियों को उनके धार्मिक अधिकारों से वंचित रखा जाएगा? जनगणना में सरना धर्म के लिए अलग कॉलम कोड की मांग दोहराई गई।
3️⃣ प्रकृति पूजा आधारित जीवन पद्धति
ज्ञापन में कहा गया कि आदिवासी समुदाय प्रकृति पूजक है—वे सूर्य, चंद्रमा, धरती, पहाड़, नदी, पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की पूजा करते हैं। यह न केवल आस्था है बल्कि पर्यावरण संतुलन का एक अनोखा जीवन दर्शन भी है।
4️⃣ अन्य धर्मों से अलग पहचान
अभियान ने स्पष्ट किया कि आदिवासी न हिंदू हैं, न ईसाई या अन्य धर्मों से जुड़े हैं। उनकी परंपराएं, संस्कार और सामाजिक संरचना पूरी तरह अलग है, जिसमें जाति व्यवस्था, दहेज और ऊंच-नीच जैसी प्रथाएं नहीं हैं।
5️⃣ “सरना” को कॉमन नाम बनाने की मांग
देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों से प्रकृति पूजा करने वाले आदिवासियों के लिए “सरना धर्म” को एक साझा नाम के रूप में स्वीकार करने की बात कही गई।
6️⃣ धार्मिक स्वतंत्रता और अस्तित्व का सवाल
सरना धर्म को मान्यता न देना, अभियान के अनुसार, आदिवासियों की धार्मिक स्वतंत्रता, पहचान और गरिमा पर सीधा हमला है।
7️⃣ सरकार से लगातार संवाद के बावजूद परिणाम शून्य
अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सांसद सालखन मुर्मू द्वारा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्रालय को कई बार पत्र लिखे जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
8️⃣ मरांग बुरू (पारसनाथ पहाड़) विवाद
झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित (मरांग बुरू) को जैन समुदाय को सौंपे जाने के निर्णय का विरोध करते हुए इसे पुनः आदिवासियों को लौटाने की मांग की गई। साथ ही लुगुबुरू और अयोध्या बुरू जैसे धार्मिक स्थलों को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग भी उठी।
इस ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में झारखंड प्रदेश अध्यक्ष देवनारायण मुर्मू, केंद्रीय संयोजक हराधन मार्डी, करमचंद हांसदा, चंद्रमोहन मार्डी, जयराम सोरेन, सुखदेव मुर्मू, फुलचंद किस्कू, कालीचरण किस्कू, विजय मरांडी, हरीशचंद्र मुर्मू, संतोष मुर्मू, सोनाराम मुर्मू, विश्वेश्वर मुर्मू, संजय टुडू, विजय मार्डी, संजय किस्कू सहित कई सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
Tags
Bokaro