बालीगुमा में पारंपरिक श्मशान व धार्मिक स्थल बचाने का संकल्प, पेसा नियमावली के अधिकार का दिया हवाला।
एमजीएम थाना क्षेत्र के बालीगुमा में आयोजित पारंपरिक ग्रामसभा की बैठक में मानगो नगर निगम कार्यालय निर्माण योजना का जोरदार विरोध किया गया। ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर इस योजना पर रोक लगाने का निर्णय लिया और आदिवासी समाज के पारंपरिक धार्मिक स्थल तथा श्मशान भूमि की रक्षा करने का संकल्प लिया।
बैठक की अध्यक्षता पारंपरिक माझी बाबा रमेश चंद्र मुर्मू ने की, ग्रामसभा में बताया गया कि बालीगुमा मौजा के वार्ड संख्या 10 स्थित खाता संख्या 727, प्लॉट संख्या 711 की भूमि पर सरकार द्वारा मानगो नगर निगम कार्यालय और अन्य योजनाओं के निर्माण का प्रस्ताव है। ग्रामसभा के सदस्यों ने कहा कि यह भूमि आदिवासी संथाल समाज की पारंपरिक माड़घाटी (श्मशान भूमि) है, जहां गोड़गोड़ा टोला, डाहारटोला, खिखड़ी घुटू, धर्मबंधा, गजरडीह और ऊपरटोला के ग्रामीण वर्षों से अपने पूर्वजों का अंतिम संस्कार करते आ रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि इसी क्षेत्र में आदिवासी संथाल समाज का पवित्र धार्मिक स्थल बिदु-चांदान जाहेरथान भी स्थित है, जो उनकी आस्था और परंपरा से जुड़ा हुआ है। ग्रामसभा का कहना है कि इस पवित्र स्थल पर किसी भी प्रकार का सरकारी निर्माण आदिवासी समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत करेगा।
नगर निगम और पारंपरिक ग्रामसभा के बीच बढ़ता टकराव
ग्रामसभा के सदस्यों ने कहा कि कुछ दिन पहले भी अनुसूचित क्षेत्रों में नगर निगम के विस्तार को असंवैधानिक बताते हुए विरोध दर्ज कराया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि बालीगुमा आज भी ग्रामीण क्षेत्र है और यहां के लोग मुख्य रूप से खेती-किसानी पर निर्भर हैं। इसलिए ग्रामवासियों ने मांग की कि मौजा बालीगुमा गोडगोड़ा को देवघर पंचायत के अधीन ही रखा जाए और इसे मानगो नगर निगम में शामिल न किया जाए।
पेसा नियमावली के अधिकार का हवाला
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पेसा नियमावली लागू होने के बाद पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में ग्रामसभा को स्वशासन का अधिकार प्राप्त है। स्थानीय संसाधनों, भूमि और परंपरागत स्थलों से जुड़े मामलों में ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य है। ग्रामीणों का कहना है कि नगर निगम की योजनाएं इस संवैधानिक व्यवस्था और पारंपरिक अधिकारों के विपरीत हैं।
धार्मिक स्थल का सीमांकन, बाहरी प्रवेश पर रोक
ग्रामसभा ने बताया कि धार्मिक स्थल और माड़घाटी भूमि का सीमांकन कर वहां बोर्ड लगा दिया गया है। साथ ही इस पवित्र स्थल पर बाहरी लोगों के अनधिकृत प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। ग्रामीणों ने सरकार से इस स्थल की सुरक्षा के लिए घेराबंदी कराने की मांग की है।
ग्रामसभा ने चेतावनी दी कि यदि जिला प्रशासन द्वारा इस भूमि पर किसी भी प्रकार की योजना लागू करने की कोशिश की गई तो ग्रामीण जोरदार विरोध करेंगे और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेंगे।
अब सवाल पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में किसकी संवैधानिक शक्ति?
इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में एक ओर पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था (ग्रामसभा) है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम प्रशासन। ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि इस क्षेत्र में किस व्यवस्था की संवैधानिक शक्ति प्रभावी मानी जाती है और प्रशासन इस विवाद को किस तरह सुलझाता है।
बैठक में नायके बाबा मोहन हांसदा, जोगमाझी बाबा लुगु हांसदा, गोडेत बाबा गणेश मार्डी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित थे।
