माकूलाकोचा ग्राम सभा का वन विभाग पर गंभीर आरोप, तालाब निर्माण कार्य रोके जाने पर आक्रोश

माकूलाकोचा ग्राम सभा का वन विभाग पर गंभीर आरोप, तालाब निर्माण कार्य रोके जाने पर आक्रोश
बिना सहमति कार्य रोकने पर पेसा कानून 1996 और वन अधिकार कानून 2006 के उल्लंघन का आरोप
चांडिल (सरायकेला-खरसावां), 25 मार्च 2026

चांडिल प्रखंड के माकूलाकोचा ग्राम सभा में बुधवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें ग्रामीणों ने वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। ग्राम सभा का कहना है कि खतियानी भूमि पर ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित तालाब निर्माण कार्य को बिना पूर्व सूचना और बिना ग्राम सभा की सहमति के रोक दिया गया, जो कि पेसा कानून 1996 और वन अधिकार कानून 2006 का सीधा उल्लंघन है।

1908 बनाम 1964 नक्शा विवाद

बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि वन विभाग द्वारा वर्ष 1908 के नक्शे का हवाला देकर जमीन मालिक शंकर सिंह को भ्रमित किया जा रहा है, जबकि पूरे क्षेत्र में वर्ष 1964 के सेटलमेंट नक्शे को मान्यता प्राप्त है। ग्राम सभा ने सवाल उठाया कि यदि 1964 का नक्शा मान्य है, तो वन विभाग 1908 के नक्शे को किस आधार पर लागू कर रहा है।

अचानक रोका गया काम

ग्राम सभा के अनुसार, संबंधित भूमि खाता संख्या 64, प्लॉट संख्या 562, रकबा 0.26 डिसमिल है, जिस पर तालाब निर्माण कार्य तीन दिनों से जारी था। इस दौरान वन विभाग ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं की, लेकिन कार्य के अंतिम चरण में अचानक रोक लगा दी गई। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है और इसे विभाग की जानबूझकर की गई कार्रवाई बताया गया।

वन विभाग पर दोहरे मापदंड का आरोप

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि वन विभाग स्वयं वन भूमि और रैयती भूमि पर तालाब खुदवा रहा है, जिससे जंगलों के पेड़ काटे जा रहे हैं और जैव विविधता को नुकसान पहुंच रहा है। इस विषय पर स्पष्टीकरण के लिए बुलाई गई ग्राम सभा बैठक में वन विभाग के अधिकारी अनुपस्थित रहे, जिससे ग्रामीणों में और रोष बढ़ गया।

व्यक्तिगत द्वेष का आरोप

ग्राम सभा ने यह भी आरोप लगाया कि जिस व्यक्ति का कार्य रोका गया, वह सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति का अध्यक्ष है, और यह कार्रवाई व्यक्तिगत द्वेष के कारण की गई है। वहीं, तीन गांवों में कुल 12 तालाब स्वीकृत हुए थे, जिनमें से 2 का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष 10 तालाबों का कार्य रोक दिया गया है।

गुजारा भत्ता की मांग

ग्राम सभा ने मांग की है कि जब तक जेसीबी मशीनों का कार्य बंद है, तब तक संबंधित लोगों को गुजारा भत्ता दिया जाए। वर्तमान में चार जेसीबी मशीनें निष्क्रिय पड़ी हैं, जिनमें से एक वन विभाग द्वारा हिरण पार्क में रखा गया है, जबकि बाकी मशीनों का कार्य पूरी तरह ठप है।

बैठक के निर्णय

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जमीन संबंधी सभी कागजी प्रक्रिया संबंधित विभाग और जमीन मालिक के माध्यम से की जाए, लेकिन विकास कार्य को नहीं रोका जाए।

संगठन की प्रतिक्रिया

इस मौके पर गांव गणराज्य लोक समिति (कोल्हान) के संगठन संयोजक बृहस्पति सिंह सरदार ने कहा कि वन विभाग स्वयं वन भूमि पर पेड़ काटकर विकास कार्य करता है, लेकिन जब ग्रामीण अपनी खतियानी जमीन पर सार्वजनिक हित में कार्य करते हैं, तो उसे रोका जाता है, जो कि एकतरफा और अन्यायपूर्ण रवैया है।

उपस्थित सदस्य

बैठक में ग्राम सभा के कई सदस्य उपस्थित थे, जिनमें प्रमुख रूप से शंकर सिंह, बलराम सिंह, रुपाई सिंह, शुकदेव सिंह, रतन सिंह, सूरत सिंह, रबिंद्र सिंह, छुटुलाल सिंह, गुणाधर सिंह, सरला सिंह, बाइबेत सिंह, गुनधु सिंह और दशरथ सिंह शामिल रहे।

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