20 मार्च 1970 को नई दिल्ली में निधन के बाद हर वर्ष 20 मार्च को महान आदिवासी नेता जयपाल सिंह मुंडा की पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। वर्ष 2026 में उनकी 56वीं पुण्यतिथि पर हेमंत सोरेन ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए दो ऐतिहासिक घोषणाएं कीं।
वैश्विक शिक्षा का नया द्वार: स्कॉलरशिप का बड़ा विस्तार
राज्य सरकार ने मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना का विस्तार करते हुए अब इसे 50 छात्रों तक पहुंचा दिया है। पहले यह संख्या केवल 6 थी, जिसे बढ़ाकर 25 और अब 50 कर दिया गया है।
इस योजना के तहत अब अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC), अल्पसंख्यक और OBC वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को यूके के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के लिए पूरी आर्थिक सहायता दी जाएगी—जिसमें ट्यूशन फीस, यात्रा और रहने का खर्च शामिल है।
यह पहल कहीं न कहीं उस ऐतिहासिक यात्रा की याद दिलाती है, जब जयपाल सिंह मुंडा 1922 में ऑक्सफोर्ड पढ़ने गए थे—उस दौर में जब आदिवासी समाज के लिए विदेश में शिक्षा लगभग असंभव थी।
ऑक्सफोर्ड से जुड़ा नया रिश्ता: डॉक्टरेट स्कॉलरशिप की शुरुआत
राज्य सरकार ने St John's College, University of Oxford के साथ मिलकर एक विशेष डॉक्टरेट छात्रवृत्ति कार्यक्रम की शुरुआत की है।
इस कार्यक्रम के तहत झारखंड के युवा पीएचडी स्तर पर रिसर्च कर सकेंगे, खासकर इन क्षेत्रों में:
आदिवासी विकास, पर्यावरण, खनिज प्रबंधन, सामाजिक न्याय
यह पहल भारत-यूके शैक्षणिक सहयोग को नई ऊंचाई देने वाली मानी जा रही है।
ऑक्सफोर्ड में खास मुलाकात और सम्मान
23 जनवरी 2026 को ऑक्सफोर्ड दौरे के दौरान हेमंत सोरेन ने सेंट जॉन कॉलेज की प्रेसिडेंट Sue Black से मुलाकात की और जयपाल सिंह मुंडा की तस्वीर भेंट की।
इस दौरान उन्होंने कॉलेज के अभिलेखागार में संरक्षित जयपाल सिंह मुंडा से जुड़े दुर्लभ दस्तावेजों को भी देखा, जो एक भावुक क्षण था।
मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा: आदिवासी अस्मिता के महानायक
जयपाल सिंह मुंडा भारत के उन महान नेताओं में से थे जिन्होंने आदिवासी समाज की पहचान और अधिकारों को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। 3 जनवरी 1903 को झारखंड के खूंटी में जन्मे और 20 मार्च 1970 को नई दिल्ली में निधन हुआ। वे 1928 के Summer Olympics 1928 में भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे और देश को गौरव दिलाया।
उन्होंने University of Oxford में शिक्षा प्राप्त की, जहां वे डिबेटिंग सोसाइटी के अध्यक्ष भी बने। बाद में वे संविधान सभा के सदस्य बने और आदिवासी अधिकारों के सबसे मुखर आवाज बने।
आदिवासी समाज ने उन्हें “मरांग गोमके” यानी “महान नेता” की उपाधि आदिवासी समाज ने दी।
हेमंत सोरेन ने अपने संदेश में कहा: हमारा संकल्प है कि मरांग गोमके की विरासत को आगे बढ़ाते हुए झारखंड के युवाओं को सशक्त बनाया जाए और राज्य की आकांक्षाओं को वैश्विक उत्कृष्टता से जोड़ा जाए।
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