Jharkhand: 17 मार्च 2026 को झारखंड में पर्यटन विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। राज्य के मुख्यमंत्री Hemant Soren की अध्यक्षता में Jharkhand Eco Tourism Authority (JETA) की शासी निकाय की हाई-लेवल बैठक आयोजित हुई, जिसमें राज्य के इको-टूरिज्म सेक्टर को नई गति देने के लिए कई अहम दिशा-निर्देश दिए गए।
झारखंड की असली पहचान उसकी प्राकृतिक संपदा
बैठक में मुख्यमंत्री Hemant Soren ने कहा कि झारखंड की सबसे बड़ी ताकत उसकी प्राकृतिक सुंदरता है—घने जंगल, पहाड़, झीलें और झरने। यदि इन्हें सही योजना और पर्यावरण-अनुकूल मॉडल के साथ विकसित किया जाए, तो राज्य पर्यटन के क्षेत्र में बड़ी पहचान बना सकता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पर्यटन विकास का मॉडल पूरी तरह इको-फ्रेंडली होना चाहिए, जिससे प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके। साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल पाएं।
विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर
बैठक में विभागीय समन्वय को भी खास महत्व दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इको-टूरिज्म को सफल बनाने के लिए वन विभाग, पर्यटन विभाग और जल संसाधन विभाग को मिलकर काम करना होगा।
इस बैठक में राज्य के मुख्य सचिव Avinash Kumar समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वहीं पर्यटन और कला-संस्कृति विभाग से जुड़े मंत्री Sudivya Kumar की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो पर्यटन परियोजनाओं के समन्वय पर जोर दे रहे हैं।
इन प्रमुख जगहों पर इको-टूरिज्म विकास की योजना
सरकार ने झारखंड के कई खूबसूरत और प्राकृतिक स्थलों को इको-टूरिज्म के रूप में विकसित करने पर चर्चा की। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
वन्यजीव और अभयारण्य: दलमा वन्यजीव अभयारण्य (जंगल सफारी), बेतला नेशनल पार्क।
हिल स्टेशन: नेतरहाट, मग्नोलिया पॉइंट, हजारीबाग।
जलप्रपात और बांध: हुंडरू, दसम, सीता, जोन्हा जलप्रपात, पतरातू घाटी, चांडिल बांध, तिलैया और मसानजोर डैम।
इन क्षेत्रों में इको-कॉटेज, जंगल सफारी, नेचर ट्रेल और एडवेंचर गतिविधियों जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।
पतरातू को मसानजोर मॉडल पर विकसित करने की योजना
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से पतरातु को पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया। इसके लिए उन्होंने मसानजोर डैम के सफल पर्यटन मॉडल को उदाहरण के रूप में अपनाने की बात कही।
मसानजोर डैम अपने शांत वातावरण, बोटिंग और प्राकृतिक खूबसूरती के कारण पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। इसी तरह का मॉडल पतरातू में लागू करने से यहां पर्यटन गतिविधियां तेज होंगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
दलमा में भी बढ़ रहा इको-टूरिज्म
झारखंड सरकार पहले से ही इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कई पहल कर रही है।Dalma Wildlife Sanctuary में हाल ही में इको-कॉटेज और जंगल सफारी जैसी परियोजनाओं की शुरुआत की गई है।
इन पहलों का उद्देश्य सिर्फ पर्यटकों को आकर्षित करना नहीं है, बल्कि सस्टेनेबल टूरिज्म के जरिए पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है, अगर सरकार की यह योजना सही तरीके से जमीन पर उतरती है, तो आने वाले वर्षों में झारखंड देश के प्रमुख इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन में शामिल हो सकता है।
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