संथाली (ओल चिकी) भाषा शिक्षकों की बहाली की मांग, मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन

चांडिल: 13 मार्च 2026 को चाण्डिल प्रखंड के रूचाप पंचायत अंतर्गत ग्राम धातकीडीह में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने मामाजी गुरुचरण किस्कू जी के सुपुत्र छोटे भाई संतोष कुमार किस्कू और वधू स्नेहा सोरेन के विवाह के उपलक्ष्य में आयोजित वर-वधू स्वागत समारोह में परिवार के साथ शामिल हूए, इस बीच संथाली (ओल चिकी) लिपि शिक्षक सह प्रचारकों ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन मुख्यमंत्री के मामाजी गुरुचरण किस्कु के आवास पर सौंपा गया, जहां शिक्षक प्रतिनिधियों ने संथाली भाषा शिक्षकों की बहाली की मांग रखी।

संथाली भाषा शिक्षकों की बहाली की मांग
ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने यह मांग की कि झारखंड में प्रस्तावित 30 हजार शिक्षकों की बहाली में संथाली (ओल चिकी) भाषा के शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाए। उनका कहना है कि इससे हमारी मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और जनजातीय भाषाओं को उचित सम्मान भी मिल सकेगा।

विधानसभा में भी उठ चुका है मुद्दा
इससे पहले झारखंड के पूर्व शिक्षा मंत्री स्व० रामदास सोरेन ने 4 मार्च 2025 को झारखंड विधानसभा में संथाली सहित जनजातीय भाषाओं के शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने राज्य में जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और शिक्षा में उनके उपयोग को मजबूत करने पर जोर दिया था।

मातृभाषा शिक्षा को मजबूत करने की पहल
शिक्षक व प्रचारकों का कहना है कि अगर संथाली (ओल चिकी) भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति होती है, तो आदिवासी बच्चों को अपनी मातृभाषा में पढ़ाई करने का बेहतर अवसर मिलेगा। इससे शिक्षा का स्तर सुधरेगा और जनजातीय संस्कृति व भाषा के संरक्षण में भी मदद मिलेगी।

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