खरीफ 2025-26 की सख्त समीक्षा: धान खरीद में तेजी, किसानों को 48 घंटे में भुगतान का निर्देश

Seraikella: जिले के समाहरणालय सभागार में खरीफ विपणन मौसम 2025-26 के तहत धान अधिप्राप्ति कार्यों की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस बार धान खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह लक्ष्य आधारित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाएगा, ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।

बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि धान की खरीद निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप सुनिश्चित की जाए और किसानों को उनकी उपज का भुगतान अधिकतम 48 घंटे के भीतर किया जाए। देश के कई राज्यों में भी इसी मॉडल को लागू किया गया है, जहां 24–48 घंटे के भीतर भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे किसानों को त्वरित आर्थिक राहत मिल सके। 

सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। खरीफ विपणन मौसम 2025-26 में धान का MSP लगभग सामान्य किस्म के लिए ₹2,369 प्रति क्विंटल और ग्रेड-'A' किस्म के लिए ₹2,389 प्रति क्विंटल तय किया गया है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। 

मॉनिटरिंग और जवाबदेही पर विशेष जोर
बैठक में जिला स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग को अनिवार्य बताया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी खरीद केंद्रों की लगातार समीक्षा हो, ताकि कहीं भी लापरवाही या देरी न हो।

धीमी प्रगति वाले लैम्प्स (LAMPs/PACS) की पहचान कर वहां विशेष फोकस करने को कहा गया। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि जमीनी स्तर पर यही संस्थाएं किसानों और सरकार के बीच मुख्य कड़ी होती हैं।


CMR प्रक्रिया और लॉजिस्टिक्स सुधार पर फोकस
बैठक में CMR (Custom Milled Rice) प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए, क्योंकि धान खरीद के बाद समय पर मिलिंग और उठाव न होने से पूरी प्रणाली प्रभावित होती है।

इसके साथ ही:
गोदाम प्रबंधन को मजबूत करने
स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर बनाने
विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया।
       भारत में MSP आधारित खरीद प्रणाली का मुख्य उद्देश्य किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाना और न्यूनतम लाभ सुनिश्चित करना है।लेकिन जमीनी स्तर पर अक्सर देरी, बिचौलियों की भूमिका और भुगतान में विलंब जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इसी वजह से अब सरकारें डिजिटल भुगतान, डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर और 48 घंटे के भुगतान मॉडल पर जोर दे रही हैं।

झारखंड सहित कई राज्यों में अब “वन-टाइम डायरेक्ट पेमेंट” और तेज प्रोसेसिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है, ताकि किसानों को तुरंत पैसा मिल सके और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो।

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