कुड़मी महतो समुदाय की एसटी मांग का JLKM नेत्री निशा भगत ने किया कड़ा विरोध

झारखंड : कुर्मी समुदाय द्वारा 20 सितंबर को प्रस्तावित रेल टेका आंदोलन ने एक बार फिर आदिवासी और कुर्मी मामला गरमा दिया है, कुर्मी समुदाय लंबे समय से अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल होने की मांग कर रहा है, जिसका आदिवासी समुदाय तीव्र विरोध कर रहा है। इस मुद्दे पर सामाजिक कार्यकर्ता और झारखंड लोकतंत्र क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) नेत्री निशा भगत ने एक न्यूज चैनल पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि कोई भी समुदाय, चाहे वह कितना भी आंदोलन कर ले, आदिवासी नहीं बन सकता, क्योंकि "आदिवासी पैदा होता है, बनाया नहीं जाता।" निशा ने जोर देकर कहा कि आदिवासियों का हक और अधिकार किसी को छीनने नहीं दिया जाएगा।

निशा ने कुर्मी समुदाय की मांग को राजनीतिक स्टंट करार देते हुए कहा कि उनकी मांग संवैधानिक रूप से गलत है। उन्होंने 1931 की जनगणना का हवाला देते हुए कुर्मी नेताओं से सवाल किया कि अगर उनके पूर्वज आदिवासी थे, तो तब विरोध क्यों नहीं हुआ? उन्होंने आदिवासियों की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान पर जोर देते हुए कहा कि भगवान बिरसा मुंडा जैसे नेताओं ने आदिवासियों के अस्तित्व को स्थापित किया। निशा ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भी निशाना साधा, आरोप लगाया कि वह सत्ता की लालच में आदिवासी हितों की अनदेखी कर रहे हैं।

उन्होंने कुर्मी नेताओं को संविधान के तहत अपनी मांग साबित करने की चुनौती दी और कहा कि आदिवासियों की जल, जंगल, जमीन और संस्कृति खतरे में है। निशा ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता आदिवासी समुदाय और उनकी परंपराएं हैं, और वह किसी भी कीमत पर इसे कमजोर नहीं होने देंगी।

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