पूर्वी सिंहभूम, झारखंड : बोड़ाम प्रखंड के बांदरजलकोचा गांव में पहाड़िया समुदाय के घरों को तोड़ने के आदेश के खिलाफ लंबे समय से चल रहे आंदोलन को आज बड़ी सफलता मिली है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और समुदाय के संयुक्त प्रयासों से राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) के हस्तक्षेप के बाद यह सुखद परिणाम सामने आया है। आयोग ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338A के तहत अपनी संवैधानिक शक्तियों का उपयोग करते हुए समुदाय की आवाज को सुना और संबंधित विभाग को समन जारी कर पहाड़िया समुदाय के पक्ष में न्याय सुनिश्चित किया।
पहाड़िया समुदाय, जो एक विलुप्तप्राय आदिम जनजाति है, के घरों को उजाड़ने के प्रस्तावित आदेश के खिलाफ तमाम क्रांतिकारी संगठनों और समुदाय के लोगों ने मिलकर आंदोलन किया था। इस मुद्दे पर लिखित शिकायतें दर्ज की गईं, जिसके बाद NCST ने संज्ञान लिया। आयोग के इस कदम से न केवल समुदाय के घर सुरक्षित हुए, बल्कि उनकी संस्कृति और अस्तित्व को संरक्षण प्रदान करने में भी मदद मिली है।
बेलोसा बबीता कच्छप ने अपनी फेसबुक पोस्ट के माध्यम से इस जीत की जानकारी साझा करते हुए NCST और सहयोगी संगठनों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, "तमाम संगठनों और पहाड़िया समुदाय की ओर से NCST का बहुत-बहुत आभार। उनके हस्तक्षेप से हमारी आवाज सुनी गई और हमें न्याय मिला।" साथ ही, उन्होंने क्रांतिकारी साथियों को 'हुल जोहार जिंदाबाद' के नारे के साथ सम्मानित किया।



