हजारीबाग : झारखंड के बड़कागांव में एनटीपीसी चट्टी बारियातू ऋत्विक माइनिंग कंपनी के खिलाफ रैयतों और स्थानीय नेताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव और पूर्व विधायक अम्बा प्रसाद ने कंपनी के मालिकों, दक्षिण भारत के भाजपा सांसद सी.एम. रमेश और उनके भाई सी.एम. राजेश पर रैयतों की जमीन हड़पने, धमकी देने और प्रशासन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। इस मामले ने झारखंड की खनन नीतियों और "जल-जंगल-जमीन" की रक्षा करने वाली सरकार के दावों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
विवाद की शुरुआत
बड़कागांव के चट्टी बारियातू क्षेत्र में एनटीपीसी और ऋत्विक माइनिंग कंपनी द्वारा कोयला खनन के लिए बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहण किया जा रहा है। स्थानीय रैयतों का आरोप है कि उनकी जमीन बिना उचित मुआवजे, सहमति या पूर्व सूचना के जबरन छीनी जा रही है। कई परिवारों ने दावा किया कि उनके घरों को बिना नोटिस के तोड़ा गया, और विरोध करने वालों के खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए।
अम्बा प्रसाद ने बताया कि रैयतों के हक के लिए प्रशासन से अनुमति लेकर धरना आयोजित किया गया था, जिसमें उचित मुआवजा, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण की मांगें उठाई गई थीं। लेकिन, इसके जवाब में कंपनी के मालिक सी.एम. राजेश ने उन्हें धमकी दी कि उनके पिता, पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को जेल भिजवाया जाएगा और उनका राजनीतिक करियर खत्म कर दिया जाएगा।धमकी और पुलिस कार्रवाई
अम्बा प्रसाद ने अपने बयान में कहा, "धमकी के अगले दिन, 17 अगस्त 2025 को, लगभग 400 पुलिसकर्मियों ने हमारे घर पर छापेमारी की। मेरे निजी गार्ड, ड्राइवर और विस्थापित क्षेत्र के रैयतों को उनके घरों से खींचकर गिरफ्तार किया गया। थाने में ले जाकर उन्हें बेरहमी से पीटा गया।" उन्होंने सवाल उठाया, "क्या झारखंड का पूरा सिस्टम बिकाऊ है? कंपनी के मालिकों को अपने पैसे और प्रभाव पर इतना भरोसा है कि वे हमें बर्बाद करने की धमकी दे रहे हैं।"
एक्स पर एक यूजर, @ActivistSandeep, ने लिखा, "डराना-धमकाना संघ और बीजेपी के खून में है। लेकिन इस बार वे गलत हाथों से टकरा गए हैं।"
एक अन्य यूजर, @Jlkmranchi, ने आरोप लगाया कि कंपनी के मालिकों को केंद्र में सत्ताधारी पार्टी का समर्थन प्राप्त है, जिसके कारण वे बेखौफ हैं।
रैयतों का दर्द
स्थानीय रैयतों का कहना है कि खनन परियोजनाओं ने उनकी आजीविका और जीवन को संकट में डाल दिया है। कई परिवार बेघर हो गए हैं, और कंपनी द्वारा किए गए रोजगार के वादे कागजों तक सीमित हैं। 12 अगस्त 2025 को, प्रदर्शनकारियों ने खनन कार्य और परिवहन को रोककर 20 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की थी, जिसमें पूर्व विधायक निर्मला देवी भी शामिल थीं। उसी दिन, ग्रामीणों और एनटीपीसी अधिकारियों के बीच हिंसक झड़प की खबरें भी सामने आई थीं।
सरकार और प्रशासन पर सवाल
अम्बा प्रसाद ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस मामले में स्वत: संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने पूछा, "क्या हमारी अबुआ सरकार, जो जल-जंगल-जमीन की रक्षा का दावा करती है, सिर्फ नारों तक सीमित है? हमारे राज्य की खनिज संपदा और जमीन को लूटने में स्थानीय अधिकारी भी कॉर्पोरेट मालिकों के इशारों पर काम कर रहे हैं।"




