रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने नगड़ी में प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण के खिलाफ तीखा विरोध जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना नोटिस या ग्राम सभा की सहमति के आदिवासियों की उपजाऊ कृषि भूमि पर कब्जा किया जा रहा है, जो सीएनटी एक्ट और भूमि अधिग्रहण कानून का उल्लंघन है। सोरेन ने कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और किसानों को बेदखल करने का आदेश देने वालों पर अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब रांची में स्मार्ट सिटी और अन्य क्षेत्रों में हजारों एकड़ बंजर जमीन उपलब्ध है, तो उपजाऊ खेती की जमीन क्यों छीनी जा रही है? सोरेन ने इसे आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार करार देते हुए कहा कि इससे किसानों की आजीविका संकट में है। उन्होंने चेतावनी दी कि 24 अगस्त को 'हल जोतो, रोपा रोपो' आंदोलन के तहत लाखों आदिवासी और झारखंडवासी नगड़ी में एकत्र होंगे और जमीन पर हल चलाकर विरोध दर्ज करेंगे।
सोरेन ने जोर देकर कहा कि उनका विरोध रिम्स-2 के निर्माण से नहीं, बल्कि आदिवासियों की जमीन छीनने की प्रक्रिया से है। उन्होंने दिशोम गुरु शिबू सोरेन के 2012 के बयान का हवाला देते हुए कहा कि आदिवासियों की जमीन किसी भी कीमत पर नहीं लूटी जाएगी। यह आंदोलन न केवल नगड़ी के किसानों, बल्कि पूरे झारखंड के आदिवासी और मूलवासी समाज की अस्मिता की लड़ाई है।

