JSSC प्रश्नपत्र विवाद का शिकायत लेकर पहुंचे संताल आदिवासी छात्रों का आरोप—मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नहीं की मुलाकात


JSSC संताली प्रश्नपत्र विवाद: राज्यपाल से मिला आश्वासन, मुख्यमंत्री से नहीं हुई मुलाकात का छात्रों ने लगाया आरोप।
रांची, 30 जुलाई। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित झारखंड क्षेत्रीय कार्यकर्ता प्रतियोगिता परीक्षा-2024 के संताली भाषा प्रश्नपत्र में कथित 40 आउट ऑफ सिलेबस एवं 4 गलत प्रश्न पूछे जाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गुरुवार को संथाल आदिवासी छात्र-छात्राओं के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा तथा मामले की निष्पक्ष जांच और पुनः परीक्षा कराने की मांग की।

छात्रों ने राज्यपाल को दिए ज्ञापन में आरोप लगाया कि संताली भाषा प्रश्नपत्र में बड़ी संख्या में ऐसे प्रश्न शामिल किए गए, जो आयोग द्वारा जारी निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर थे। साथ ही चार प्रश्न तथ्यात्मक रूप से गलत बताए गए हैं। उनका कहना है कि इससे हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है और परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, राज्यपाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सकारात्मक आश्वासन दिया और कहा कि उनकी मांग संबंधित विभाग को भेजी जाएगी। साथ ही उन्होंने छात्रों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी इस संबंध में लिखित ज्ञापन सौंपने की सलाह दी।

मुख्यमंत्री से नहीं हो सकी मुलाकात
छात्रों का आरोप है कि राज्यपाल के सुझाव के बाद वे मुख्यमंत्री आवास पहुंचे, लेकिन वहां मौजूद मुख्यमंत्री के एक सहयोगी ने उन्हें बताया कि मुख्यमंत्री उनसे नहीं मिलेंगे। छात्रों का कहना है कि उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने का अवसर नहीं दिया गया और बिना मुलाकात के ही लौटना पड़ा।

हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस संबंध में समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


पहले भी JSSC को दी जा चुकी है आपत्ति
छात्रों के अनुसार, 22 जुलाई 2026 को भी इस मामले में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को लिखित आवेदन देकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। लेकिन अब तक आयोग की ओर से कोई स्पष्ट निर्णय या कार्रवाई नहीं की गई है।

अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें
  • संताली भाषा प्रश्नपत्र की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच।
  • 40 आउट ऑफ सिलेबस एवं 4 गलत प्रश्नों की विशेषज्ञ समिति से समीक्षा।
  • जांच पूरी होने तक परीक्षा परिणाम पर रोक।
  • आपत्तियां सही पाए जाने पर संताली भाषा की पुनः परीक्षा आयोजित की जाए।

परीक्षा की निष्पक्षता पर उठे सवाल
यदि जांच में अभ्यर्थियों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल एक प्रश्नपत्र की त्रुटि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, समान अवसर और चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा। फिलहाल अभ्यर्थियों की नजर राज्य सरकार, JSSC और संबंधित विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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