तालसा गांव के कथित सामाजिक बहिष्कार मामले का हुआ समाधान
ज मशेदपुर, 9 जून 2026। पूर्वी सिंहभूम जिले के ग्राम तालसा में मंगलवार को ग्रामसभा की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें गांव के एक परिवार द्वारा लगाए गए सामाजिक बहिष्कार और धमकी से संबंधित आरोपों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता गांव के माझी बाबा दुर्गा चरण मुर्मू ने की। बैठक में परंपरागत ग्राम व्यवस्था से जुड़े पदाधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, ग्रामीणों तथा समाज के गणमान्य लोगों ने भाग लिया।
जानकारी के अनुसार, ग्राम तालसा निवासी मंगली मुर्मू के परिवार की ओर से सामाजिक बहिष्कार तथा धमकी दिए जाने संबंधी शिकायत संबंधित अधिकारियों को दी गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ग्रामसभा एवं गांव के कुछ लोगों द्वारा परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है तथा उन्हें गांव छोड़ने और राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इसी शिकायत की सत्यता और वास्तविक स्थिति की जांच के उद्देश्य से ग्रामसभा की विशेष बैठक आयोजित की गई।
ग्रामसभा में दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद मामले की निष्पक्ष समीक्षा की गई और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया गया।
शिकायतकर्ता से पूछे गए महत्वपूर्ण प्रश्न
बैठक की शुरुआत में शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से उपस्थित मंगल हेंब्रम से ग्रामसभा के सदस्यों एवं उपस्थित ग्रामीणों ने विस्तार से जानकारी ली। उनसे पूछा गया कि कथित बहिष्कार किस प्रकार किया गया, क्या इसके लिए ग्रामसभा की कोई औपचारिक बैठक हुई थी, क्या गांव की परंपरागत व्यवस्था के तहत कोई निर्णय लिया गया था तथा किन लोगों द्वारा उन्हें धमकी दी गई थी।
साथ ही यह भी जानने का प्रयास किया गया कि क्या उन्हें जान से मारने, गांव से निकालने अथवा किसी विशेष राजनीतिक दल में शामिल होने के लिए दबाव डाला गया था।
ग्रामसभा और ग्रामीणों ने आरोपों का किया खंडन
इसके बाद माझी बाबा दुर्गा चरण मुर्मू, ग्रामसभा के अन्य पदाधिकारियों तथा ग्रामीणों का पक्ष भी सुना गया। सभी ने एक स्वर में कहा कि ग्रामसभा द्वारा किसी भी व्यक्ति या परिवार के सामाजिक बहिष्कार का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
ग्रामीणों ने कहा कि गांव में इस प्रकार का कोई प्रस्ताव न तो पारित किया गया और न ही किसी बैठक में इस संबंध में चर्चा हुई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी ग्रामीण द्वारा शिकायतकर्ता परिवार को जान से मारने, मारपीट करने अथवा गांव से भगाने जैसी कोई धमकी नहीं दी गई है।
“ग्रामसभा का उद्देश्य हमेशा गांव में सामाजिक सौहार्द, शांति और पारंपरिक व्यवस्था को बनाए रखना रहा है तथा किसी भी विवाद का समाधान आपसी संवाद और सामूहिक निर्णय के माध्यम से किया जाता है।”
बैठक के दौरान गांव के बुजुर्गों, समाज के विचारकों एवं पारंपरिक व्यवस्था से जुड़े लोगों ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ग्रामसभा का उद्देश्य हमेशा गांव में सामाजिक सौहार्द, शांति और पारंपरिक व्यवस्था को बनाए रखना रहा है तथा किसी भी विवाद का समाधान आपसी संवाद और सामूहिक निर्णय के माध्यम से किया जाता है।
मंगल हेंब्रम ने स्वीकार की गलती
लंबी चर्चा और सभी पक्षों की बात सुनने के बाद मंगल हेंब्रम ने ग्रामसभा के समक्ष अपना पक्ष रखा। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें या उनके परिवार को माझी बाबा अथवा ग्रामसभा के किसी सदस्य द्वारा किसी राजनीतिक दल को छोड़कर दूसरे दल में शामिल होने के लिए बाध्य नहीं किया गया था।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें गांव छोड़ने, मारपीट करने या जान से मारने की कोई धमकी नहीं दी गई थी।
मंगल हेंब्रम ने आगे कहा कि उन्होंने अन्य लोगों के बहकावे में आकर शिकायत दर्ज कराई थी तथा शिकायत पत्र भी किसी अन्य व्यक्ति द्वारा लिखकर दिया गया था। उन्होंने स्वीकार किया कि शिकायत में लगाए गए आरोप वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं थे।
मंगल हेंब्रम द्वारा माफी मांगने और आरोप वापस लेने के बाद ग्रामसभा ने भी उदारता दिखाते हुए उन्हें और उनके परिवार को क्षमा कर दिया। उपस्थित ग्रामीणों ने इस निर्णय का स्वागत किया और गांव में आपसी भाईचारे, सामाजिक एकता और शांति बनाए रखने का संकल्प लिया।
बैठक में उपस्थित प्रमुख लोग
बैठक में मुख्य रूप से तोरोप परगना बाबा दसमत हांसदा, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल पदाधिकारी जमशेदपुर, थाना प्रभारी सुंदरनगर, माझी बाबा बिरसिंह बास्के, सेनबसु हांसदा, रेंटा सोरेन, मदन मुर्मू, उकिल हांसदा, कारु मुर्मू, सुशील मुर्मू, दीपक मुर्मू, डेमका सोय, नायके हाबीराम मुर्मू, पारानिक सुकमन मुर्मू, गोड़ेत बाबलू मुर्मू, वकिल हेंब्रम, भागवत मार्डी, जितेन हेंब्रम, रामचंद्र टुडू, रघुनाथ टुडू, वार्ड सदस्य सारोती हेंब्रम, लक्ष्मी हेंब्रम, हराधान हेंब्रम, दारोगा हेंब्रम, सुधीर बेसरा एवं राजिन हेंब्रम सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी एवं समाज के लोग उपस्थित थे।
अध्यक्षीय संबोधन
बैठक के अंत में अध्यक्षीय संबोधन देते हुए माझी बाबा दुर्गा चरण मुर्मू ने कहा कि गांव और समाज की एकता ही सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने सभी ग्रामीणों से अपील की कि किसी भी प्रकार की शिकायत या विवाद होने पर पहले ग्रामसभा के समक्ष तथ्य रखें ताकि संवाद और आपसी समझदारी के माध्यम से उसका समाधान किया जा सके।
बैठक धन्यवाद ज्ञापन एवं जोहार के साथ संपन्न हुई।