सांसद साहू ने सदन में कहा, "संताल परगना क्षेत्र, जो आदिवासी बहुल है, वहां सूर्या हांसदा नामक एक संथाली व्यक्ति अवैध खनन और कारोबारियों का विरोध करता था। वह प्राकृतिक संपदा, विशेषकर कोयले की लूट को रोकने के लिए आंदोलन चलाता था। इसके साथ ही, वह 500 गरीब बच्चों को शिक्षा देने का नेक कार्य भी कर रहा था। लेकिन अवैध कोयला खदान चलाने वालों और कारोबारियों को उसका विरोध बर्दाश्त नहीं हुआ। प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से उसकी मुठभेड़ के नाम पर गोली मारकर हत्या कर दी गई।"
उन्होंने कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) पर निशाना साधते हुए कहा, "ये वही दल हैं जो आदिवासियों के हितैषी होने का दावा करते हैं, लेकिन मौका मिलते ही उनके साथ अन्याय और अत्याचार करते हैं। सूर्या हांसदा एक विराट हृदय का सम्राट था, जिसे षड्यंत्र के तहत मार दिया गया। आज उसका परिवार और गरीब लोग दहाड़ें मारकर रो रहे हैं। यह कांग्रेस और आरजेडी की करतूत है, जिनके समर्थन से झारखंड में सरकार चल रही है। ये लोग चोर की बात करते हैं और पूरे क्षेत्र को कंगाल करने का काम करते हैं।"
साहू ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की और कहा कि सूर्या हांसदा का परिवार जनजातीय समाज की सांस्कृतिक और सामाजिक व्यवस्था का अगुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध खनन में खनन माफियाओं और पुलिस प्रशासन की साठगांठ है, जिसके चलते इस तरह की घटनाएं हो रही हैं।
यह मुद्दा झारखंड में पहले से ही सियासी बवाल का कारण बना हुआ है। बीजेपी और अन्य विपक्षी नेताओं ने इस एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की है। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने भी इस मामले को गहरी साजिश का हिस्सा बताया है और कहा है कि सूर्या हांसदा अवैध खनन और आदिवासियों के शोषण के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, जिसके कारण उन्हें निशाना बनाया गया।
सूर्या हांसदा के एनकाउंटर ने झारखंड की राजनीति में हलचल मचा दी है और यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। इस मुद्दे पर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन विपक्ष इसे आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार का प्रतीक बनाकर जोर-शोर से उठा रहा है।

