खूंटी (रांची) में पेसा एवं पारंपरिक ग्रामसभा के अधिकार पर कार्यशाला, 27 ग्रामसभाओं से करीब 140 प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

खूंटी, 2 अक्टूबर। ग्रामसभा सशक्तिकरण कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को रनिया प्रखंड के बनाई गांव स्थित मध्य विद्यालय परिसर में पेसा एवं पारंपरिक ग्रामसभा के अधिकार विषय पर एक दिवसीय सामुदायिक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन संवाद की ओर से किया गया। कार्यशाला में 27 ग्रामसभाओं से करीब 140 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यशाला का उद्देश्य पेसा और पारंपरिक ग्रामसभा के अधिकारों एवं भूमिका को समझने के साथ ग्रामसभा की कार्यप्रणाली और दस्तावेजीकरण को मजबूत करना था। इस दौरान विभिन्न ग्रामसभाओं के प्रतिनिधियों ने अपने गांवों की परिस्थितियों, पारंपरिक व्यवस्थाओं, ग्रामसभा के अनुभवों और स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली चुनौतियों को साझा किया।

कार्यशाला में बेनेडिक्ट नौरंगी ने पारंपरिक ग्रामसभा की संरचना, विभिन्न पदों और उनकी जिम्मेदारियों पर चर्चा की। उन्होंने ग्रामसभा की बैठकों, निर्णयों और सामुदायिक गतिविधियों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही ग्रामसभा में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।

अलेस्टेयर बोदरा ने पेसा और पारंपरिक ग्रामसभा के बीच संबंधों पर चर्चा करते हुए कहा कि पेसा के प्रावधानों को पारंपरिक ग्रामसभा की व्यवस्था और स्थानीय स्वशासन की समझ के साथ जोड़कर देखना आवश्यक है। उन्होंने ग्रामसभा को समुदाय के सामूहिक निर्णय और स्वशासन की महत्वपूर्ण संस्था के रूप में समझने पर जोर दिया।

जॉन जुर्सेन गुड़िया ने पारंपरिक ग्रामसभा और स्थानीय स्वशासन से जुड़े विषयों पर जानकारी दी। उन्होंने भूमि, सामुदायिक अधिकारों और संबंधित दस्तावेजों के महत्व पर चर्चा करते हुए समुदाय के पास उपलब्ध जानकारी और अभिलेखों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता बताई।

कार्यशाला में ग्रामसभा के दस्तावेज एवं रजिस्टर, बैठकों की कार्यवाही, निर्णयों का लेखा-जोखा और अभिलेखों के नियमित संधारण पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने दस्तावेजीकरण से जुड़ी स्थानीय समस्याओं और अपने अनुभवों को साझा किया।

वक्ताओं ने कहा कि ग्रामसभा केवल बैठक आयोजित करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि सामूहिक निर्णय, स्थानीय स्वशासन और समुदाय की भागीदारी का महत्वपूर्ण मंच है। महिलाओं समेत समुदाय के सभी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी और पारंपरिक व्यवस्था की समझ ग्रामसभा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अन्ना कलेटुस कंडुलना ने की, जबकि संचालन रेजन गुड़िया ने किया। आयोजन में सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न ग्रामसभाओं के प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही।

समापन के अवसर पर जेनिफर बखला ने कार्यशाला से प्राप्त जानकारी को गांवों की नियमित ग्रामसभा प्रक्रिया से जोड़ने, स्थानीय अनुभवों को दर्ज करने और समुदाय स्तर पर दस्तावेजीकरण को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि ग्रामसभा को सशक्त बनाने के लिए अधिकारों की जानकारी के साथ सक्रिय भागीदारी, सामूहिक निर्णय, पारंपरिक ज्ञान की समझ और व्यवस्थित दस्तावेजीकरण आवश्यक है।

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